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धूल में मिल गई एमपी के इस इंजीनियरिंग कॉलेज की साख, भर नहीं पाई कई ब्रांच की सीट

अब सीएलसी राउंड में लेंगे प्रवेश...

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रीवा

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Ajit Shukla

Aug 12, 2018

Seat vacant in Govt Engineering College of Rewa, admission in CLC

Seat vacant in Govt Engineering College of Rewa, admission in CLC

रीवा। शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया के दो चरणों के बाद भी सीट खाली रह गई है। अब कॉलेज लेवल काउंसिलिंग के जरिए विभिन्न ब्रांचों की रिक्त सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए छात्र-छात्राओं को निर्धारित दिवस पर संबंधित दस्तावेजों के साथ कॉलेज में आवेदन करना होगा।

प्रवेश के लिए दोपहर 12 बजे तक लिया जाएगा आवेदन
कॉलेज प्राचार्य के मुताबिक, बीई प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए छात्रों को 13 अगस्त को आवेदन करना होगा। सीएलसी के तहत बची सीट पर प्रवेश के लिए दोपहर 12 बजे तक आवेदन लिया जाएगा। इसके बाद मेरिट के आधार पर छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा। गौरतलब है कि कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग को छोडक़र बाकी के सभी ब्रांचों में सीट खाली है। सबसे अधिक 44 सीट इलेक्टॉनिक एंड कम्युनिकेशन ब्रांच में खाली हैं।

बीई द्वितीय वर्ष में प्रवेश 14 अगस्त को
बीई द्वितीय वर्ष में बची सीटों पर प्रवेश के लिए 14 अगस्त की तारीख तय की गई है। छात्र दोपहर 12 बजे तक आवेदन कर सकेंगे। हालांकि द्वितीय वर्ष में प्रवेश के लिए बहुत कम सीट रिक्त हैं। सिविल इंजीनियरिंग में एक, मैकेनिकल में पांच, इलेक्ट्रिकल में 5 व इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में चार सीट खाली है। गौरतलब है कि बीई द्वितीय वर्ष में पॉलिटेक्निक उत्तीर्ण छात्रों सीधे प्रवेश दिया जाता है।

बीई प्रथम वर्ष में खाली सीट
प्रवेश प्रक्रिया के दो चरणों के बाद भी कॉलेज में कई ब्रांचों की सीट खाली रह गई है। कॉलेज प्राचार्य के मुताबिक केवल सिविल इंजीनियरिंग में सीट भर पाई है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 12 सीट, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 12, इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन में 44 व कंप्यूटर साइंस में 10 सीट खाली रह गई है। रिक्त सीटों पर अब कॉलेज लेवल काउंसिलिंग के जरिए प्रवेश होगा।

विंध्य का है इकलौता शासकीय कॉलेज
शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की यह स्थिति तब है, जबकि यह कॉलेज विंध्य का इकलौता कॉलेज है। वैसे तो निजी कॉलेजों की संख्या एक दर्जन से अधिक है लेकिन शासकीय कॉलेज पूरे विंध्य क्षेत्र में यह इकलौता है। इसके बावजूद छात्र प्रवेश लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।