
रीवा। वक्त शाम 4.10 बजे। ईएनटी का वार्ड। बीस बेड पर केवल दो मरीज ही मौजूद। ये हाल है विंध्य के सबसे बड़े गांधी स्मारक चिकित्सालय के नाक कान गला विभाग का। दोपहर 1:30 बजे के बाद यहां न डॉक्टर होते हैं और न नर्सिंग स्टॉफ, मरीज भगवान भरोसे रहते हैं।
पत्रिका ने गुरुवार शाम 4 बजकर 10 मिनट पर नाक कान गला विभाग (ईएनटी) की व्यवस्थाओं की पड़ताल की तो भयावह स्थिति मिली। ऑपरेशन थियेटर में ताला लटक रहा था। वार्ड में सिंगरौली निवासी मरीज प्रेम सिंह नाक के दर्द से परेशान थे। उधर सामने की बेड पर ताला मुकुंदपुर की रामवती सोंधिया गले की बीमारी के चलते कुछ बोल नहीं पा रही थीं। वार्ड में डॉक्टरों के चेम्बर के दरवाजे बंद थे। नर्सों की कुर्सियां खाली थी। पूछने पर परिजनों ने बताया कि सुबह से कोई डॉक्टर नहीं आया। दोपहर 12.30 बजे नर्स आईं थी। इसके बाद कहां चली गईं कोई जानकारी नहीं है। दो मरीजों के अलावा वार्ड में केवल परिजन ही थे शेष सारे बेड खाली पड़े थे। हालात ये हैं कि मरीज को अचानक कुछ हो जाए तो डॉक्टर छोडि़ए, नर्से भी उपलब्ध नहीं होंगी।
मरीजों की भर्ती घटी
ईएनटी वार्ड में मरीजों की भर्ती संतोषजनक नहीं कही जा सकती है। यहां बीते तीन महीने के भर्ती आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी में 31 रोगी, फरवरी में 33 और मार्च में 19 मरीज भर्ती किए गए हैं। अर्थात 88 दिन में 83 मरीजों की भर्ती रही। अर्थात एक दिन में एक मरीज का भी औसत नहीं है।
ओपीडी तक सीमित चिकित्सा
वहीं ईएनटी में ओपीडी के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां हर महींने में डेढ़ हजार से ऊपर ओपीडी है। जनवरी में 1804 मरीज, फरवरी में 1791 और मार्च में 1655 रोगी ओपीडी में देखें गए हैं। अर्थात ईएनटी की चिकित्सा ओपीडी तक ही सीमित है।
ये डॉक्टर हैं पदस्थ
डॉ. अनिल अग्रवाल
डॉ. सुरेन्द्र सिंह मोपाची
डॉ. पल्लवी इंदुलकर
डॉ. यास्मीन सिद्दिकी
डॉ. मनोज सिंह
डॉ. सुप्रिया अग्रवाल
डॉ. श्रीकांत शुक्ला
डॉ. राजीव बाबू द्विवेदी
Published on:
30 Mar 2018 12:17 pm
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