
Without the permission and the NOC, the pond made the mine
रीवा। निजी पूंजी निवेश से फोरलेन सड़क बना रही कंपनी खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रही है। बिना अनुमति लिए ग्राम पंचायत मढ़ी के पचपरहा स्थित तालाब की ऐसी खोदान की है कि अब वह गहरी खदान में तब्दील हो गया है। तालाब के जानलेवा खार्इं में बदलने से आम निस्तार बंद है, ग्रामीण तालाब पर जाने से कतरा रहे है। इस उत्खनन को रोकने पंचायत सचिव ने तहसीलदार को पत्रााचार किया था लेकिन वह चुप बैठे रहे।
मनगवां से चाकघाट का फोरलेन सड़क का निर्माण बीओटी योजना में बसंल इंफ्रा कर रही है। इस सड़क को बनाने के लिए कंपनी ने ग्राम पंचायत की अनापत्ति लिए तालाब से धड़ल्ले से मिट्टी निकाल रही है। इससे पूरा तालाब अब 100 फीट से अधिक गहरी खाई में बदल गया है। तालाब में अवैध उत्खनन को लेकर ग्राम सभा में पास कराने के बाद पंचायत सचिव ने जनपद सीईओ रायपुर कर्चुलियान व तहसीलदार को लिखित सूचना दी थी। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई ।
तालाबों का स्वरुप बदलने पर लगी है रोक
जलसंरक्षण को लेकर एक जनहित याचिका में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नदी व तालाबों को संरक्षित करने के लिए उसके स्वरुप बिगाडऩे पर रोक लगा रही है। इतना ही नहीं सभी राज्य सरकारों को निर्देशित किया है कि वह तालाब व नदियों को संरक्षित करें,लेकिन लगातार नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
अनुमति लेना है अनिवार्य
प्रदेश सरकार ने सड़क निर्माण के लिए मुरम एवं मिट्टी को रायल्टी मुक्त कर रखा है। लेकिन इसके खनन के लिए संबंधित ग्राम पंचायत व खनिज विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है । यहां तक कि खनन के दौरान कंपनी को सुरक्षा के उपाय भी अनिवार्य रुप से अपनाने होगें। लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।
हमने कई बार लिखा पत्र-
ग्राम पंचायत मढ़ी के सचिव लालजी वर्मा ने बताया कि तालाब में हो रहे उत्खनन के संबंध संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी। यहां तक कि तहसीलदार व सीईओ को लिखित रुप से अवगत कराय, लेकिन खनन नहीं रुका। तालाब अब खाईं बन गया है। आम निस्तार के दौरान इसमें जान को खतरा है।
Published on:
01 Nov 2018 12:40 pm
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