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…तो इस सीजन भी गर्मी में पसीना-पसीना होंगे मरीज व डॉक्टर्स

बर्न वार्ड, आइसीयू के मरीजों को होंगी ज्यादा दिक्कतें, नोटिस काम आए न चेतावनी, बदहाल पड़ा बीएमसी का चिलर प्लांट
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सागर

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Murari Soni

Mar 19, 2024

BMC students do not want to become doctors after studying in Hindi, no

BMC students do not want to become doctors after studying in Hindi, no


सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के संवेदनशील वार्डों में कूलिंग व्यवस्था के लिए लगा चिलर प्लांट 5 साल बाद भी बदहाल है। ठेकेदार को नोटिस और चेतावनी जैसे तमाम प्रयासों के बाद भी सेंट्रल एसी की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो रहा है। ऐसे में इस सीजन भी मरीज गर्मी से बेहाल होंगे। सबसे ज्यादा दिक्कतें बर्न वार्ड और आइसीयू में भर्ती मरीजों को होगी।

बीएमसी में 2019 से बंद चल रहे चिलर प्लांट की मरम्मत करने 8 माह पहले प्रबंधन ने टेंडर निकाले थे। 1 करोड़ 70 लाख रुपए में टेंडर लेने वाली फर्म ने अभी तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया है। गर्मी के सीजन तक सेंट्रल एसी चालू हो जाए इसलिए बीएमसी प्रबंधन ने फर्म को नोटिस पर नोटिस दिए और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी लेकिन फर्म ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। दबाव पड़ा तो फर्म ने दिल्ली से इंजीनियर बुलाया और चिलर प्लांट की जांच की। जांच के बाद इंजीनियर गए तो वापिस नहीं लौटे। फर्म ने चिलर प्लांट के महंगे पार्ट्स ऑर्डर तो कर दिए हैं लेकिन अभी तक पार्ट्स नहीं आए और कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है।

बीएमसी के ऑपरेशन थियेटर, आइसीयू, पीआइसीयू, बर्न सहित तमाम संवेदनशील वार्डों में कूलिंग व्यवस्था चौपट बनी हुई है। अब गर्मी का सीजन भी आ गया है। ऐसे में एसी-कूलर से व्यवस्थाएं बनाई जाएंगी। डॉक्टर्स की माने तो वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बर्न वार्ड में चलने वाले एसी-कूलर से इंफेक्शन का खतरा रहता है।

हो सकती है कड़ी कार्रवाई-

हर साल गर्मी के सीजन में बर्न वार्ड के मरीजों कूलर एसी लगाने पड़ते हैं। ऑपरेशन थियेटर में ऑपरेशन करते समय पसीना से भीग जाते हैं। जिससे मरीज-डॉक्टर को इंफेक्शन का खतरा रहता है। 2023 के शुरूआती माह में कमिश्नर ने मेडिकल कॉलेज में चिलर प्लांट की मरम्मत व रखरखाव और संचालन के लिए टेंडर करवाए थे। शर्त थी कि फर्म गर्मी सीजन के पहले तक मरम्मत कार्य पूरा करे। फर्म ने कम रेट पर ठेका तो ले लिया लेकिन कार्य नहीं किया। डीन कार्यालय ने एक के बाद एक 7 नोटिस दिए फिर भी कार्य शुरू नहीं हुआ। मरीजों को लेकर लापरवाही बरतने पर अब प्रबंधन फर्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कह रहा है।

इन्हें 8 माह से मशीन के पार्ट्स नहीं मिले-

चिलर प्लांट की 3 बड़ी मशीनों में से एक पूरी तरह बंद पड़ी है। चिलर प्लांट में फर्म ने अभी तक लाइनों और बड़े-बड़े पंखों की मरम्मत भी शुरू नहीं की है। वहीं फर्म से जुड़े लोगों की माने तो उन्होंने पुणे से 70 लाख रुपए के पार्ट्स ऑर्डर किए हैं। पार्ट्स आते ही कार्य शुरू कर देंगे। सभी मशीनें ओल्ड मॉडल की हैं, लिहाजा इनके पार्ट्स मिलने में भी देरी हो रही है।

10 साल कंपनी तो कुछ माह पीडब्ल्यूडी ने की देखरेख-

मेडिकल कॉलेज बनते ही 2009 में सेंट्रल एसी का सेटअप किर्लोस्कर कंपनी ने लगाया था। जब तक सेटअप नया था तो कंपनी ही देखरेख कर रही थी। 10 साल तक कंपनी ने देखरेख की उसके बाद 2019 में कुछ समय से लिए पीडब्ल्यूडी ने भी देखरेख का कार्य संभाला था और फिर पीडब्ल्यूडी ने भी व्यवस्थाएं संभालने में हाथ खड़े कर दिए थे। 2019 के बाद से एसी प्लांट बदहाल पड़ा है।

फैक्ट फाइल-

2009 में लगा था चिलर प्लांट।

10 साल तक कंपनी ने रखरखाव किया।

1 साल पीडब्ल्यूडी ने की देखरेख।

2019 से बदहाल पड़ा था।

8 माह पहले हुए थे टेंडर।

1 करोड़ 70 लाख में दिया गया है कार्य।

-अभी तक सेंट्रल एसी की व्यवस्था पूरी हो जानी चाहिए थीं। दो दिन पहले ही अधीक्षक के साथ चिलर प्लांट का निरीक्षण किया था। फर्म ने प्लांट में कोई कार्य नहीं किया है। सेंट्रल एसी की मशीनें, लाइन, पंखें सुधारने में काफी समय लगेगा। फर्म के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के लिए हम कमेटी बना रहे हैं, जल्द ही ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. रमेश पांडेय, डीन बीएमसी।

-गर्मी में ऑपरेशन थियेटर में जाकर ऑपरेशन करना मुश्किल होता है, ओटी से बाहर निकलने पर पसीना से नहा जाते हैं। ओटी व बर्न वार्ड में ऐसी-कूलर चलाना मतलब इंफेक्शन को निमंत्रण देना होता है। कुछ वार्डों में सेंट्रल ऐसी की कूलिंग व्यवस्था जरूरी होती है। बर्न वार्ड में पिछले वर्ष 9 एसी लगाए गए थे जो कि कम पड़ गए थे।

डॉ. सर्वेश जैन, प्रो. बीएमसी।