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ड्यूटी पर न आने वाले डॉक्टरों का अलग रजिस्टर बनाकर बीएमओ ने निकाला वेतन, दवाओं की जगह लाखों रुपए के खरीदे एसी और फर्नीचर

जांच रिपोर्ट में अनियमितताएं आईं सामने, एसडीएम को सौंपी रिपोर्ट, कलेक्टर को करेंगे आगे की कार्रवाई

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BMO deducted salaries of doctors not coming to duty by maintaining a separate register, purchased ACs and furniture worth lakhs of rupees instead of medicines

फाइल फोटो

बीना. ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर पर रोगी कल्याण समिति के लाखों रुपए मनमाने तरीके से खर्च कर भ्रष्टाचार करने की शिकायत की गई थी। इसके बाद कलेक्टर के आदेश पर एसडीएम ने जांच टीम गठित की थी। टीम में तहसीलदार अंबर पंथी, बीएमओ राजेश पस्तोर आदि शामिल थे। जांच रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी गई है।
कीर्तन सेन द्वारा तत्कालीन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अरविंद गौर की शिकायत की गई थी। जांच में आगासौद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में जन आरोग्य समिति का गठन नियमानुसार नहीं किया गया। रोगी कल्याण समिति के 30 लाख रुपए टेबिल, कुर्सी, एसी, अलमारी और अन्य सामग्री में खर्च की गई है। जबकि मरीजों के लिए पलंग, दवाईयों पर राशि खर्च होनी थी। जन अरोग्य समिति गठित न कर स्वयं ही नोटशीट चलाकर खरीदी की गई, जो टीम ने नियमविरुद्ध माना है। डॉ. गौर पर आरोप है कि रोगी कल्याण समिति आगासौद के बैंक खाते से बिना अनुमोदन व बैठक के 1 अप्रेल 23 से दिसंबर 2024 तक करीब 36 लाख रुपए खरीदी में खर्च किए गए हैं और यह राशि सिविल अस्पताल में स्वयं के चेंबर और गैर जरुरी कार्यों में खर्च किए गए। इसकी जांच में पाया गया है कि 50 हजार रुपए के भुगतान पर कुटेशन प्राप्त नहीं किए गए और अधिकांश भुगतान फर्नीचर, एसी, कंप्यूटर पर किया गया, लेकिन स्टाक रजिस्टर नहीं है। साथ ही 17 लाख 9 हजार 360 रुपए का जो भुगतान हुआ है, उसके बिल वाउचर उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसमें नियमों का पालन नहीं हुआ है। शिकायत में उल्लेख नहीं किया गया था कि शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन ठाकुर और सर्जन डॉ. शिवम दीवान सितंबर 23 से सितंबर 24 तक का वेतन आहरण किया गया है, जिसमें 25 लाख रुपए शासन के दिए गए। टीम ने दोनों डॉक्टरों के संबंध में स्टाफ के बयान लिए गए, जिसमें बताया गया कि दोनों डॉक्टर एक वर्ष में कभी भी ड्यूटी करने उपस्थित नहीं हुए और न उनका नाम ड्यूटी डॉक्टर के रूप में अंकित है। इसी तरह बांडेड डॉक्टर आयुषी ठाकुर, तनय बोरगोकर, मानसी मदगल, रोहन अवस्थी के संबंध में स्टाफ से बयान लिए गए, तो स्टाफ ने बताया कि एक वर्ष में चारों डॉक्टर कभी ड्यूटी करने उपस्थित नहीं हुए। रजिस्टर पर नाम भी अंकित नहीं है। इसके बाद भी डॉ. गौर ने वेतन निकाला और इनके रजिस्टर भी अलग बनाए गए थे।

पद का किया है दुरुपायोग
टीम ने जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष में उल्लेख किया है कि बीएमओ डॉ. गौर ने पद का दुरुपयोग कर, नियमों का पालन न करते हुए मूलभूत सुविधाओं की जगह फर्नीचर, एसी आदि खरीदे हैं। जबकि दवाएं खरीदने की आवश्यकता थी। सही तरीके से कुटेशन बुलाकर खरीदी नहीं की गई। साथ ही डॉक्टरों का वेतन बिना ड्यूटी के, अलग से रजिस्टर बनाकर निकालना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

कलेक्टर को भेजेंगे प्रतिवेदन
डॉ. गौर के मामले में टीम से जांच कराई गई थी, जिसमें गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं और आगे की कार्रवाई को लेकर यह प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजा जाएगा।
विजय डेहरिया, एसडीएम, बीना