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ओवरब्रिज के नीचे अतिक्रमण से बढ़ी परेशानी, एंबुलेंस को भी लगाना पड़ रहा चक्कर

अस्पताल और मंडी रोड पर अव्यवस्था, नगर पालिका नहीं कर रही कार्रवाई, एक बार कार्रवाई करने के बाद भूले, जिससे दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है अतिक्रमण, खड़े रहते हैं स्थानीय लोगों के वाहन

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Encroachment under the overbridge has increased the problem, even the ambulance has to make a detour.

ओवरब्रिज के नीचे लगी दुकानें। फोटो-पत्रिका

बीना. शहर के खुरई रोड स्थित ओवरब्रिज के नीचे बढ़ते अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां सडक़ किनारे लग रहीं दुकानों और खड़े वाहनों से मार्ग संकरा हो गया है, जिससे वाहनों को निकलने में दिक्कत हो रही है।
इस रास्ते पर अस्पताल और मंडी जाने वाले लोगों की आवाजाही अधिक रहती है, लेकिन अतिक्रमण होने और वाहनों की अवैध पार्किंग बनाने के कारण वाहन एक तरफ से दूसरी तरफ नहीं निकल पा रहे हैं। स्थिति इतनी खराब है कि एंबुलेंस को भी मरीज लेकर जाने के दौरान चक्कर लगाकर दूसरे रास्ते से जाना पड़ता है। कई बाद जाम में एंबुलेंस फंसने से मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं। जिला अस्प्ताल जाने के लिए एंबुलेंस को ब्रिज के नीचे से निकलकर दूसरे रास्ते पर जाना पड़ता है और बीच में फैले अतिक्रमण, वाहनों के कारण बड़ी मशक्कत के बाद एंबुलेंस निकल पाती है। इसके बाद भी इस ओर जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। यहां यातायात पुलिसकर्मी भी तैनात नहीं किए जाते हैं, जो व्यवस्था बना सकें।

कुछ माह पहले हुई कार्रवाई, फिर लगने लगी दुकानें
कुछ माह पहले नगर पालिका ने यहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी, लेकिन इसके बाद फिर से दुकानों का लगना शुरू हो गया है। वर्तमान में हालात पहले जैसे ही हो गए हैं, जिससे समस्या और बढ़ गई है। मंडी में अधिक आवक के समय ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है और वाहनों को निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यहां आने वाले लोगों ने इस समस्या के समाधान की मांग की है। अस्पताल आने वाले व मंडी जाने वाले किसानों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। लोगों का कहना है यदि व्यवस्था नहीं सुधारी जा सकती है, तो मंडी ओर अस्पताल को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए।

एक्सपर्ट व्यू:
सेवानिवृत्त प्रधान आरक्षक यातायात कमलेश पाठक ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए। साथ ही ओवरब्रिज के नीचे नो-पार्किंग जोन घोषित कर सख्ती से पालन कराया जाए। यातायात पुलिस की नियमित निगरानी और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी बढ़ाने से भी व्ययवस्था सुधारी जा सकती है।