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मामले में दोनों पक्ष ने कर लिया था राजीनाम लेकिन न्यायालय ने सुनाई सजा

कोर्ट ने कहा समझौते के आधार पर नहीं छोड़ा जा सकता आरोपियों को

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In the case both the parties had agreed but the court sentenced

In the case both the parties had agreed but the court sentenced

बीना. घर में घुसकर मारपीट करने के मामले में आरोपी पति-पत्नी को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौहान ने तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए अर्थदंड लगाया है। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच राजीनामा हो गया था, लेकिन अपराध राजीनामा योग्य न होने पर न्यायालय ने दोनों को सजा सुनाई। अपर विशेष लोक अभियोजक डीके मालवीय ने बताया कि 14 सितंबर 2019 को ग्राम ऐरण निवासी शारदा कुशवाहा अपने पति दयाचंद और बच्चों के साथ घर में बैठी थी। इसी दौरान मोहरसिंह पिता बारेलाल रैकवार अपने घर के सामने खड़े होकर पुरानी बुराई को लेकर गाली-गलौज कर रहा था और दयाचंद ने उसे मना किया तो मोहरसिंह ने घर में घुसकर दयाचंद के साथ राड से मारपीट की थी। साथ ही आरोपी की पत्नी पंखी उर्फ अवधरानी रैकबार भी मौके पर पहुंच गई और बीच-बचाव करने आई शारदा के साथ पंखी ने मारपीट कर दी, जिससे शारदा और दयाचंद घायल हो गए थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया था। इस मामले में 13 मार्च 2020 को दोनों पक्षों ने राजीनामा कर लिया था। इस मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस अपराध में समझौते के आधार पर आरोपियों को छोड़ा नहीं जा सकता है। अशमनीय अपराध में समझौता होने पर न्यायालय द्वारा दंडादेश की मात्रा कम की जा सकती है, लेकिन दोषमुक्त नहीं किया जा सकता है। न्यायाधीश ने साक्ष्यों और बयानों के आधार पर मोहरसिंह और पंखी रैकबार को धारा 458 और धारा 326 में तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक-एक हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।