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अंत्योदय एक्सप्रेस में 96 नाबालिगों को ले जाने की सूचना पर बीना स्टेशन पर की गई जांच

सीडब्ल्यूसी, जेजेबी की टीम सागर से पहुंची थी बीना तक, पूर्व सूचना देने के बाद भी ज्यादा देर तक नहीं रोकी गई ट्रेन, वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों से की जाएगी शिकायत

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Investigation conducted at Bina station on information of 96 minors being carried in Antyodaya Express

नाबालिग बच्चों और उनके साथ यात्रा कर रहे लोगों से चर्चा करते हुए। फोटो-पत्रिका

बीना. अंत्योदय एक्सप्रेस में 96 नाबालिगों को फैक्ट्री या अन्य जगहों पर ले जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूूसी), किशोर न्यायालय बोर्ड सदस्य (जेजेबी) और बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सागर से ट्रेन में सवार होकर बीना पहुंचे थे, लेकिन ट्रेन को ज्यादा समय तक न रोके जाने से सही तरीके से पूछताछ नहीं हो सकी। सदस्यों ने रेलवे अधिकारी और आरपीएफ, जीआरपी पर सहयोग न करने का आरोप लगाया है। क्योंकि पहले से ही रेलवे कंट्रोल रूम भोपाल, जबलपुर सहित डीआरएम को सूचना दे दी गई थी। इसके बाद भी एक भी बच्चे को रेस्क्यू नहीं किया जा सका।
बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य ओमकार सिंह ने बताया कि जानकारी मिली थी कि ट्रेन के 17 कोचों में 96 नाबालिग बच्चे सवार हैं, जिन्हें फैक्ट्री या अन्य जगहों पर काम के उद्देश्य से ले जाया जा रहा है। जानकारी मिलने के बाद बाल कल्याण समिति ने रेलवे अधिकारियों, कंट्रोल रूम को पत्र भेजकर बीना में ट्रेन का ज्यादा स्टॉपेज देकर सर्चिंग कराने का उल्लेख किया था। साथ ही सदस्य सवार होकर बीना स्टेशन पहुंचे, जहां रास्ते में बच्चों से चर्चा भी की थी। ट्रेन शाम 5.25 बजे बीना स्टेशन पहुंची थी, जहां आरपीएफ डीआई कमल सिंह, जीआरपी थाना प्रभारी बीबीएस परिहार स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे थे। इस दौरान किशोर न्यायालय बोर्ड की सदस्य वंदना तोमर, बाल कल्याण समिति सदस्य भगवतशरण बनवारिया, अनिल रैकवार, चंद्रप्रकाश शुक्ला, आवाज संस्था जिला समन्वयक मालती पटेल, कृषक सहयोग संस्था से नितिन सेन, लक्ष्मी अवस्थी, हरनाम सिंह, प्रशांत सेन, एड. अभिषेक राय, शिवम पाठक, रिंकू मिश्रा, जतिन रजक आदि शामिल थे।

अलग-अलग कोचों में की तलाश
ट्रेन 5.37 बजे तक रुकी और इस दौरान अलग-अलग कोचों में पुलिस ने जांच की। साथ ही जिन नाबालिगों को ले जाने का संदेह था उनमें से कुछ बच्चों से समिति के सदस्यों ने ट्रेन के बाहर भी उतारकर चर्चा की। इस दौरान उनके साथ कुछ अन्य लोग भी उतरे और साथ में बच्चों को ले जाने की बात कही। कम समय होने पर बिना पूछताछ के लिए ही वह फिर से ट्रेन में सवार होकर चले गए।

एक संदिग्ध को ट्रेन से उतारकर की पूछताछ
टे्रन से बिहार के एक संदिग्ध युवक को उतारा गया है, जिसपर बच्चों को फैक्ट्री ले जाने का शक था और समिति सदस्यों ने पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया, क्योंकि जीआरपी से कोई भी उसे लेने नहीं पहुंचा था। इस लापरवाही की शिकायत सदस्यों द्वारा रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से की जाएगी।