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ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए नहीं मिलेगा सरकार का समर्थन, उड़द खरीदने तैयार

अधिकारियों का तर्क, मूंग में लगता है ज्यादा पानी और डलती हैं कीटनाशक दवाएं, किसान बता रहे उड़द को ज्यादा दिन की फसल, जिससे खरीफ फसल की बोवनी में होगी देरी।
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No government support for summer moong, ready to buy urad

मूंग की फसल। फोटो-पत्रिका

बीना. ग्रीष्मकालीन मौसम में पिछले तीन वर्षों से किसान मूंग की बोवनी तीसरी फसल के रूप कर रहे हैं और खरीदी समर्थन मूल्य पर होने से दाम भी अच्छे मिल जाते हैं, लेकिन इस वर्ष शासन ने समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद न करने का निर्णय लिया है। मूंग की जगह उड़द फसल की बोवनी करने किसानों को जागरूक किया जा रहा है और उड़द की खरीदी भी समर्थन मूल्य पर होगी। इस निर्णय से किसान नाखुश हैं।
पिछले वर्ष किसानों ने 3800 हेक्टेयर में मूंग की बोवनी की थी और अच्छा उत्पादन हुआ था। फसल तैयार होने के बाद शासन ने मूंग को जहरीला बताकर समर्थन मूल्य पर खरीदी करने से मना कर दिया था और फिर किसान संगठनों के दबाव में खरीदी करनी पड़ी थी, लेकिन इस वर्ष अभी से मूंग खरीदी से इंकार किया जा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी भी इसका प्रचार कर रहे हैं और मूंग की जगह उड़द की फसल की बोवनी करने प्रेरित कर रहे हैं। उड़द का बीज भी अनुदान पर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही उड़द की खरीदी समर्थन मूल्य पर होनी है, जिसका समर्थन मूल्य 7800 रुपए हैं और 600 रुपए बोनस भी मिलेगा।

किसान कर रहे मूंग की बोवनी
समर्थन मूल्य पर खरीदी न होने की जानकारी होने के बाद भी किसान बड़ी मात्रा में मूंग की बोवनी कर रहे हैं। किसान श्रवण सिंह ने बताया कि मूंग की फसल 60 दिन में तैयार हो जाती है और उड़द की 70 से 80 दिन में होगी। फसल पकने में देरी होने पर मौसम खराब होने लगता है और नुकसान हो जाता है। साथ ही उड़द और मूंग की फसल में पानी, दवाएं भी बराबर ही लगती हैं। सरकार को मूंग खरीदी करनी चाहिए, जिससे किसानों को नुकसान न हो।

मूंग में कीटनाशक का उपयोग होता है ज्यादा
ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी के लिए अभी तक कोई आदेश नहीं आए हैं, लेकिन उड़द की खरीदी एमएसपी पर होनी है, जिसमें बोनस भी मिलेगा। मूंग में कीट ज्यादा लगने से कीटनाशक दवा ज्यादा डलती हैं और पानी भी पांच बार देना पड़ता है। वहीं, उड़द फसल में दो बार दवा डालनी पड़ेगी और तीन बार पानी देना होगा। कीटनाशक का उपयोग कम करने और पानी की बचत के लिए उड़द की बोवनी ज्यादा करने किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।
राजेश त्रिपाठी, उप संचालक, कृषि