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Parul Sahu: यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंची पूर्व विधायक, माउंट एल्ब्रुस पर फहराया तिरंगा

Parul Sahu: पूर्व भाजपा विधायक और पर्वतारोही पारुल साहू को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 अगस्त को दिल्ली से किया था रवाना, 17 अगस्त को यूरोप की 18467 फीट ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर मध्य प्रदेश समेत देश का नाम किया रोशन

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सागर

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Sanjana Kumar

Aug 19, 2024

parul sahu

मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहने वाली पारूल साहू ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी एल्ब्रुस पर फहराया तिरंगा।

Parul Sahu: पूर्व भाजपा विधायक और पर्वतारोही पारुल साहू ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहरा दिया। मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहने वाली पारुल साहू को इस चोटी पर माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच ये मुकाम हासिल किया। इस दौरान घुटनों में सूजन और दर्द के बादजूद उन्होंने हार नहीं मानी और यूरोप की सबसे ऊंची इस बर्फिली चोटी पर तिरंगा फहराकर ही दम लिया।

पीएम मोदी का संदेश लेकर पहुंची थी पारुल

यूरोप की सबसे ऊंची माउंट एल्ब्रुस चोटी पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराती नजर आ रही पारुल साहू (Parul Sahu) यहां पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का संदेश लेकर पहुंची थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान 'एक पेड़ मां के नाम' का ये संदेश इस चोटी से उन्होंने दुनिया भर को दिया। वे अपने साथ अभियान का पोस्टर और तिरंगा झंडा (National Flag) लेकर पहुंची थीं।

बता दें कि देश-दुनिया में बदलते पर्यावरण और इससे होने वाले खतरों से बचने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पेड़ मां के नाम अभियान शुरू किया है। इसी का पोस्टर संदेश लेकर एमपी के सागर जिले की रहने वाली पारुल यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर पहुंचीं।

सागर जिले की पूर्व विधायक और पर्वतारोही पारुल साहू ने यहां से पूरी दुनिया को क्लाइमेट चेंज के दुष्परिणामों से बचने का संदेश दिया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने किया था रवाना

बता दें कि पारूल साहू बीते 8 अगस्त को एमपी की राजधानी भोपाल से रवाना हुई थीं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान का पोस्टर पर्वतारोही दल की पारुल साहू को सौंपा। इसे लेकर निकली पारुल और पूरी टीम ने 17 अगस्त को एल्ब्रुस चोटी पर संदेश पहुंचाया और देश का नाम रोशन किया। इस साहसिक अभियान में 8 सदस्यीय दल शामिल था।

18467 फीट ऊंची है बर्फीली चोटी, मुश्किलों को चीरती बढ़ती रहीं पारुल

पारुल साहू (Parul Sahu) ने बताया कि 14 अगस्त को 12467 फीट ऊंचाई पर स्थित गरबाशी बेस कैंप से निकलने का प्लान था, लेकिन घुटने में सूजन आने के कारण और अत्याधिक ठंड के कारण एक बार उन्हें रुकना पड़ा। इस दौरान दल में शामिल फिजियो ने रेगुलर शारीरिक अभ्यास कराया।

फिटनेस सही होने पर हल्के दर्द के साथ उन्होंने एक बार अपना ये अभियान शुरू किया। पर्वतारोही दल के टीम लीडर पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल रोमिल के साथ 18510 फीट ऊंची एल्ब्रुस चोटी (Highest peak Mount Elbrus) पर 16 अगस्त की रात से चढ़ना शुरू किया था।

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एल्ब्रुस का अनुभव भी एकदम अलग रहा

पारुल साहू ने बताया कि पिछले दो दशकों से देश दुनिया की कई चोटियों पर फतेह हासिल कर चुकी हैं। लेकिन यूरोप (Europe) की इस चोटी पर पहुंचना एक अलग अनुभव था। यूरोप की सबसे सर्द और बर्फीली चोटी पर तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस रहता है। हवा की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रतिघंटा थी।

इस गलाने वाली ठंड में हम लोगों ने धीरे-धीरे चढ़ना शुरू किया। चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर थी। यहां टीम के सदस्यों की सुरक्षा अहम थी। अनुभवों के सहारे इस मुकाम को 17 अगस्त को पूरा कर लिया और एक पेड़ मां के नाम का पोस्टर लहराते हुए पूरे दुनिया में संदेश दिया।

2013 में भाजपा विधायक बनकर आईं थीं चर्चा में

बता दें कि पारुल साहू 2013 में बीजेपी के टिकट पर सागर जिले की सुरखी विधानसभा सीट से विधायक का चुनाव जीतकर चर्चा में आई थीं। 2018 में उन्हें कांग्रेस के गोविंद सिंह राजपूत से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गईं। लेकिन इस बार हुए लोकसभा चुनाव 2024 से पहले पारुल साहू ने एक बार फिर बीजेपी में घर वापसी की।

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