16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बैठक में हुआ था अस्पताल में सुरक्षा गार्ड रखने का प्रस्ताव पारित, अभी तक नहीं हो पाए नियुक्त, आए दिन होते हैं विवाद

अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान

2 min read
Google source verification
Security guards not appointed in civil hospital

Security guards not appointed in civil hospital

बीना. सिविल अस्पताल में आए दिन डॉक्टर और मरीजों का विवाद होता है, लेकिन अभी तक यहां सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं किए गए हैं। रोगी कल्याण समिति में भी गार्ड रखने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन इसपर अमल अभी तक नहीं हो पाया है। अधिकारियों ने एजेंसी के माध्यम से सुरक्षा गार्ड रखने के लिए कहा है।
सिविल अस्पताल में रात के समय सबसे ज्यादा विवाद की स्थिति निर्मित होती। शराबी अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों से अभद्रता करते हैं। साथ ही कई बार शराबी महिला वार्ड, जनरल वार्ड में घुसकर मरीजों से अभद्रता करने लगते हैं और कर्मचारियों द्वारा मना करने पर मारपीट करने तैयार हो जाते हैं। इसके बाद भी अभी तक यहां सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं किए गए हैं। पिछले दिनों हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में बंदूकधारी सुरक्षा गार्ड तैनात करने का प्रस्ताव पास हुआ था, लेकिन अधिकारियों द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी गई और एजेंसी के माध्यम से गार्ड नियुक्त करने के लिए कहा है। क्योंकि समिति से नियुक्ति करने पर रोक लगा दी गई है। अस्पताल में विवाद की स्थिति बनने पर पुलिस को बुलाया जाता है, लेकिन पुलिस के पहुंचने तक विवाद बड़ जाता है।
पिछले साल हुए थे डॉक्टरों से विवाद
पिछले साल अस्पताल में डॉक्टरों से विवाद होने के कई मामले सामने आ चुके हैं। जिसमें डॉक्टरों के साथ गाली-गलौज और मारपीट तक की गई। इन घटनाओं ेके बाद यहां डॉक्टर, स्टाफ ने सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग को लेकर अधिकारियों को पत्र भी लिखा था और पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाने की मांग की थी, लेकिन अभी कोई व्यवस्था नहीं हुई है। कुछ माह पहले ही डॉक्टर और मरीज के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद दोनों पक्ष पर मामला भी दर्ज किया गया।
एजेंसी से होना है नियुक्ति
अस्पताल में कर्मचारी की नियुक्ति आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से होना है। इसलिए रोगी कल्याण समिति में पारित हुए प्रस्ताव पर अमल नहीं हुआ है। सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति भी एजेंसी के माध्यम से ही होगी।
डॉ. संजीव अग्रवाल, बीएमओ