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मिट्टी में नाइट्रोजन पर्याप्त, फिर भी अंधाधुंध हो रहा यूरिया का उपयोग, जमीन हो रही खराब

किसान मिट्टी परीक्षण को लेकर नहीं हो रहे जागरूक, जिससे नहीं बन पा रहा संतुलन, सूक्ष्य पोषक तत्वों में आ रही कमी से जमीन की घटना रही उर्वरकता

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Soil contains sufficient nitrogen, yet urea is being used indiscriminately, causing soil degradation.

फाइल फोटो। एआई

बीना. क्षेत्र के किसान मिट्टी परीक्षण को लेकर जागरूक नहीं हो रहे हैं और बिना जांच के ही मनमाने तरीके से रासायनिक खादों का उपयोग कर रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारी लगातार मिट्टी परीक्षण के लिए जागरूक कर रहे हैं, लेकिन फिर भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि ब्लॉक में मिट्टी परीक्षण लैब भी स्थित है।
कृषि विभाग के अनुसार क्षेत्र की मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश पर्याप्त मात्रा में है, इसके बावजूद किसान अधिक उत्पादन की उम्मीद में क्षमता से अधिक यूरिया डाल रहे हैं। इसका सीधा असर मिट्टी की गुणवत्ता पर पड़ रहा है और जमीन धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन के चलते 25 किलो एकड़ यूरिया डालने की जगह आधा डालने की जरूरत है, इतनी मात्रा में भी फसल अच्छी होगी। असंतुलित खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है। खेतों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी आ रही है, जिससे फसलों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है।

लक्ष्य 1127 का, आया सिर्फ एक सैंपल
कृषि विभाग के बाजू से मिट्टी परीक्षण लैब है और अभी तक सिर्फ एक सैंपल आया है, जबकि 1127 सैंपल की जांच करने का लक्ष्य आया है। किसान स्वयं सैंपल लेकर जांच कराने नहीं पहुंच रहे हैं। इसके लिए कृषि विभाग के कर्मचारियों को सैंपल लेकर आना पड़ता है।

क्या होते हैं सूक्ष्म पोषक तत्व
फसलों की अच्छी वृद्धि के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें जिंक, आयरन, सल्फर, बोरॉन, कॉपर, मैंगनीज और मॉलिब्डेनम प्रमुख हैं। इनकी कमी होने पर पौधों की वृद्धि रुक जाती है, पत्तियां पीली पडऩे लगती हैं और उत्पादन घट जाता है। यह कमी ज्यादा रासायनिक उर्वरक डालने, नरवाई जलाने से होती है।

ऐसे बढ़ाएं सूक्ष्म पोषक तत्व
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सूक्ष्म पोषम तत्व बढ़ाने खेतों में गोबर खाद और वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करें। साथ ही हरी खाद और फसल अवशेष मिट्टी में मिलाएं। समय-समय पर मिट्टी परीक्षण कराएं, रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग करें।

कर रहे हैं किसानों को जागरूक
मिट्टी का परीक्षण कराने किसानों को जागरूक किया जाता है। मिट्टी परीक्षण के बाद ही संतुलित उर्वरक का उपयोग हो सकता है। जिन पोषक तत्वों की कमी है, उसके अनुसार ही खाद डालने और जैविक खेती करने की सलाह दी जा रही है।
दीपेश मोघे, उर्वरक निरीक्षण, कृषि विभाग, बीना