
छतरपुर. फर्जी बिलों के माध्यम से बड़े पैमाने पर की जा रही जीएसटी चोरी का पर्दाफाश करते हुए सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) की निवारण शाखा ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जबलपुर सीजीएसटी आयुक्त लोकेश कुमार लिल्हारे के निर्देश पर की गई इस छापामार कार्रवाई ने स्क्रैप कारोबारियों के एक ऐसे नेटवर्क को उजागर किया है, जो लम्बे समय से बिना वैध दस्तावेजों और फर्जी बिलों के जरिए स्क्रैप का अवैध कारोबार कर रहा था।
शहर के पांच प्रमुख स्क्रैप कारोबारियों के ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए। जैसे ही टीम की कार्रवाई शुरू हुई, पूरे बाजार में हडक़ंपमच गया। कई कबाड़ कारोबारी आनन-फानन में अपनी दुकानें बंद कर भाग खड़े हुए। जिन कारोबारियों के यहां छापे मारे गए, उनके नाम हैं - मेसर्स प्रिंस मेटल्स के संचालक मोहम्मद साजिद, मेसर्स मंसूरी ट्रेडर्स के मोहम्मद खालिद, मेसर्स प्रिंस इंडस्ट्रीज के फिर से मोहम्मद साजिद, मेसर्स साहिर मेटल्स के तालिब सौदागर और मेसर्स दुर्गा मेटल्स के गोपाल शरण ताम्रकार।
रोहतक से मिले इनपुट
इस कार्रवाई की शुरुआत हरियाणा के रोहतक से हुई। दरअसल, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर आयुक्तालय, रोहतक द्वारा की गई एक जांच में जबलपुर सीजीएसटी को अहम इनपुट प्राप्त हुए थे। जांच के दौरान हरियाणा स्थित सुपर टेक नामक फर्म से प्राप्त दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आई कि छतरपुर के उपरोक्त कारोबारी फर्म से फर्जी बिल प्राप्त कर रहे थे और उन्हें जीएसटी रिटर्न में दर्शाकर भारी मात्रा में कर चोरी कर रहे थे। इनपुट मिलते ही जबलपुर सीजीएसटी की 15 सदस्यीय टीम छतरपुर पहुंची और पांच अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की।
इनपुट टैक्स क्रेडिट में घालमेल
टीम द्वारा की जा रही जांच में पाया गया है कि स्क्रैप का यह अवैध कारोबार सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसमें बड़े पैमाने पर कच्चे बिलों का इस्तेमाल हो रहा था। दस्तावेजों के विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हुआ कि व्यापारियों ने पीडि़त अथवा अनभिज्ञ कारोबारी फर्मों के नाम से फर्जी इनवॉइस तैयार किए और उनके माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत दावा किया गया।
रिकॉर्ड जब्त, हो रही बारीकी से जांच
फिलहाल सीजीएसटी टीम द्वारा सभी दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉड्र्स को जब्त कर उनकी बारीकी से जांच की जा रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि जब तक इन सभी फर्जी लेनदेन और इनवॉइस का गहन मूल्यांकन नहीं किया जाता, तब तक कर चोरी की वास्तविक राशि का आकलन नहीं किया जा सकता। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार यह जीएसटी चोरी करोड़ों में हो सकती है। जांच के दायरे में न केवल छतरपुर के पांच कारोबारी आए हैं, बल्कि अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यापारियों और बिचौलियों की भी पहचान की जा रही है। टीम उन मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जो इस पूरे फर्जी बिल रैकेट के केंद्र में हैं। जल्द ही इस गिरोह के किंगपिन पर कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
26 May 2025 08:55 pm
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