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सरकारी स्कूलों का ऐसा हाल: किसी में खेल मैदान के लिए जगह नहीं तो किसी में आंगन जैसे स्थान खेलने लायक नहीं

खेलो इंडिया दावों की निकल रही हवा, कई स्कूल मुख्य सड़कों पर हो रहे संचालित, खेल के बिना कैसे होगा बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास, स्कूलों में सिर्फ किया जाता है खेलने जागरूक

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This is the state of government schools: some lack playground space, while others lack play areas like courtyards.

बरदौरा स्कूल जो नदी किनारे ढलान पर बना है। फोटो-पत्रिका

बीना. शिक्षा और खेल को लेकर बड़े-बड़े दावे सरकारें करती हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। खेलों को बढ़ावा देने खेलो इंडिया सहित अन्य आयोजन होते हैं, जो खेल मैदान के अभाव में सिर्फ दिखावा साबित होते हैं। बीना ब्लॉक में प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों में व्यवस्थित खेल मैदान नहीं हैं। हायर और हायर सेकंडरी स्कूलों में खेलने के लिए जगह छोड़ी गई है, लेकिन कई जगह इन स्कूलों में भी अभाव है।
जानकारी के अनुसार ब्लॉक में 105 प्राथमिक और 55 माध्यमिक स्कूल हैं। इन स्कूलों में कहीं भी व्यवस्थित खेल मैदान नहीं है। कुछ स्कूलों में खेल मैदान के नाम पर छोटी से जगह खाली पड़ी है, जो पर्याप्त नहीं है। मैदान न होने से बच्चों को सिर्फ खेल के संबंध में जानकारी दी जाती है, खेल कराए नहीं जाते हैं। यदि खेल मैदान बनाए जाएं, तो बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों से भी खेल प्रतिभाएं निकलकर सामने आएंगी। खेल मैदान न होने की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी है, लेकिन इस ओर कोई पहल नहीं की जाती है।

स्कूल के सामने से निकली नदी
बरदौरा गांव में स्थित प्राथमिक स्कूल में खेल मैदान तो दूर की बात है, बच्चों को आने-जाने में भी परेशानी होती है। यहां सामने से निकली मोतीचूर नदी का पानी बारिश में स्कूल तक आ जाता है, जिससे बच्चों को खतरा बना रहता है। साथ ही ढलान पर स्कूल होने से बच्चों के गिरने का खतरा रहता है।

स्कूल के सामने से निकली मुख्य सड़क
बाहरी इटावा क्षेत्र में स्थित प्राथमिक स्कूल आगासौद रोड पर खुला है और स्कूल से निकलते ही बच्चे सीधे मुख्य सड़क पर पहुंच जाते हैं, जबकि यहां से चौबीसों घंटे भारी वाहन निकलते हैं। यहां बच्चों को खेलने के लिए जगह नहीं है। इसी तरह अन्य स्कूलों में भी स्थिति है।

निजी स्कूलों पर होती है कार्रवाई
समय-समय पर निजी स्कूलों की जांच कर खेल मैदान सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं न होने पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन सरकारी स्कूलों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।

छोटे मैदान हैं
कुछ प्राथमिक, माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां खेल मैदान नहीं हैं। साथ ही कई जगहों पर खेल मैदान हैं, लेकिन वह छोटे हैं।
महेन्द्र सिंह, बीआरसीसी, बीना