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बिना बजह ही रोक दी जाती हैं आउटर पर ट्रेनें, फिर होती है घटनाएं

कई बार घटनाओं के बाद भी नहीं हो रहा सुधार

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Trains are stopped without restrictions

Trains are stopped without restrictions

बीना. रेलवे स्टेशन के आउटर में कई बार ट्रेनों में लूट, पत्थरबाजी जैसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इन घटनाओं से रेलवे ने सबक नहीं लिया और अभी भी ट्रेनों को बिना बजह रोक दिया जाता है, जिससे शनिवार की रात भी एक घटना हुई, जिसमें आगासौद-बीना स्टेशन के बीच झेलम एक्सप्रेस खड़ी कर देने पर एक सनकी यात्री ने लोको पायलट के साथ मारपीट कर दी। यदि आरोपी इंजन में कुछ हरकत कर देता तो यात्रियों की जान भी खतरे में आ सकती थी। पिछले वर्ष ही आगासौद स्टेशन के पास गौंडवाना-जबलपुर एक्सप्रेस में लूट की घटना को अंजाम दिया था, जिसमें तीन महिलाओं के जेवर छीन लिए थे। इससे पहले भी आगासौद स्टेशन पर इस प्रकार की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद भी यात्री ट्रेनों को सीधे सिग्नल नहीं दिए जाते हैं और उन्हें आउटर में खड़ा कर दिया जाता है। इसके साथ ही मालखेड़ी स्टेशन के पहले महादेवखेड़ी स्टेशन पर भी ट्रेनों को रोका जाता है। यहां मंडल चैंज होने के कारण यह स्थिति बनती है। शहर के आउटरों पर भी ट्रेनों को रोके जाने की समस्या खत्म नहीं हो रही है, जबकि स्टेशन पर छटवां प्लेटफॉर्म भी बनकर तैयार हो चुका है। यहां अधिकारी प्लेटफॉर्म खाली न होने का हवाला देते हैं।
इंजन में भी नहीं कोई सुरक्षा इंतजाम
लोको पायलट और सहायक के लिए इंजन में भी सुरक्षा के कोईइंतजाम नहीं रहते। यदि कोई व्यक्ति इंजन में अंदर चला जाए तो उससे बचाव करना भी मुश्किल है। इंजन में गर्मी ज्यादा होने के कारण, बाजू से गुजरने वाली ट्रेनों को देखने, सिग्नल चैक करने के कारण वह गेट बंद नहीं कर पाते हैं और हमेशा ही गेट खोलकर रखने पड़ते हैं। कईबार पहले चालकों के साथ मारपीट की घटनाएं हुई भी हुई हैं, लेकिन अभी तक रेलवे ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। इस संबंध में रेलवे यूनियनों द्वारा भी मांग की जा चुकी है।
डायरी आने पर होगा मामला दर्ज
जिस आरोपी ने झेमल एक्सप्रेस में लोको पायलट के साथ मारपीट की थी उसे जीआरपी ने ट्रेन से उतार लिया था। वह अपना नाम फ्रांसिस और असम का निवासी बता रहा है। थाना प्रभारी ने बताया कि अभी तक डायरी न आने के कारण उसके खिलाफ मामला दर्जनहीं हो पाया और वह मानसिक रुप से कमजोर लग रहा है।