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pregnancy के समय बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकती है यह बीमारी

गर्भवती महिला का ब्लड शुगर लेवल हाई हो जाए तो यह गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बहुत ही घातक साबित हो सकता है।

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world diabetes day 2017

world diabetes day 2017

सागर. डायबिटीज की बीमारी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में वल्र्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इस बार वल्र्ड डायबिटीज-डे की थीम 'महिला और डायबिटीज : स्वस्थ भविष्य के लिए हमारा अधिकार रखी है। महिलाओं में थकान, कमजोरी, आंखों की रोशनी कम होने जैसी शिकायतें आ रही हैं तो उन्हें डायबिटीज की बीमारी हो सकती है। इस बीमारी से हड्डियों पर ज्यादा असर पड़ता है। सागर जिला अस्पताल की जांच लैब से मिली जानकारी के अनुसार अभी प्रतिदिन 30 से 40 केस महिलाओं को डायबिटीज होने के आ रहे हैं। यह संख्या भी हर साल लगातार बढ़ती जा रही है। बीते साल के इसी महीने में यह आंकड़ा 20-30 केस प्रतिदिन आने का था। यदि इन आंकड़ों पर गौर किया जाए तो प्रति वर्ष डायबिटीज से पीडि़त लगभग 10 महिला मरीज बढ़ रही हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
डफरिन जिला अस्पताल की सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. किरण सिंह ने बताया कि डायबिटीज एक जेनेटिक बीमारी है। गर्भावस्था के साथ ही यह बीमारी महिलाओं में बढ़ जाती है। जेनेटिक होने से इसे खत्म नहीं किया जा सकता। हां, कंट्रोल जरूर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि रोग यदि बढ़ जाता है और गर्भवती महिला का ब्लड, शुगर लेवल हाई हो जाए तो यह गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बहुत ही घातक साबित हो सकता है। यदि गर्भवती महिला का वजन बढ़ जाता है तो इस बीमारी में नॉर्मल डिलेवरी होने में बहुत परेशानी आती है। यह बीमारी गर्भ में पल रहे व नवजात शिशु के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इससे डिलेवरी होने के तुरंत बाद भी बच्चे की जान जा सकती है। महिला की भी स्थिति गंभीर अवस्था में पहुंच सकती है।

यह सावधानी बरतें
महिलाओं के लिए इस बीमारी में डाइट का ध्यान रखना चाहिए। योग व व्यायाम करना चाहिए। फास्ट फूड जैसी चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। डायबिटीज में कमजोरी दूर करने के लिए डाइट रेग्यूलर करनी पड़ती है। वजन घटाकर, नियमित आहार पर ध्यान देकर रोग पर काबू पाया जा सकता है।

योग से डायबिटीज का इलाज संभव
महिला पतंजलि योग समिति सागर की जिला योग विस्तारक जयंती सिंह ने बताया कि विश्व में भारत देश डायबिटीज रोग की श्रेणी में पहले स्थान पर है। इस रोग का योगाभ्यास से इलाज किया जा सकता है। कई बहनों को ऐसा करने से लाभ मिला है। नियमित रूप से आहार, निद्रा व व्यायाम अपनी जीवन शैली में शामिल करें। योगिक इलाज में षट कर्म, शुद्ध क्रिया, शंख प्रक्षालन, सूर्य नमस्कार, आसन, मुद्रा बंध, प्राणायाम, योग निद्रा, शिथिलीकरण, ध्यान और संतुलित आहार से डायबिटीज से मुक्ति मिल सकती है। सागर में महिलाओं की नि:शुल्क 15 योग कक्षाएं संचालित हैं। इनमें डायबिटीज से पीडि़त बहनों की संख्या ज्यादा है।

इसलिए मनाया जाता है दिवस
इंसुलिन की खोज 1921 में फ्रेडरिक बेन्टिंग द्वारा की गई थी। इसी की याद में विश्व डायबिटीज दिवस हर साल १४ नवंबर को मनाया जाता है। 2006 से यह संयुक्त राष्ट्र विश्व डायबिटीज दिवस हो गया है। वर्ष 2017 की थीम है- महिला और डायबिटीज : स्वस्थ भविष्य के लिए हमारा अधिकार।

ऐसे समझें डायबिटीज को
इंसुलिन आश्रित डायबिटीज
आम बोलचाल की भाषा में इसे आईडीडीएम कहा जाता है। इस डायबिटीज में अग्नाशय के अंदर इन्सुलिन का निर्माण बहुत कम या बिलकुल भी नहीं होता है।

इंसुलिन अनाश्रित डायबिटीज
इसे एनआईडीडीएम नाम से जाना जाता है। इसमें अग्नाशय के अंदर इंसुलिन का निर्माण कम होता है या कार्यक्षमता बहुत कम होती है। इसमें जेनेटिक कारण भी महत्वपूर्ण हैं।

जैस्टेशनल डायबिटीज
यह सिर्फ गर्भावस्था के दौरान ही पनपता है। आशंका ज्यादातर उन महिलाओं में होती है, जिनके परिवार में यह पहले भी किसी को रही हो। इसे जीडीएम भी कहते हैं।

कुपोषण जनित डायबिटीज
इसे एमआरडीएम के नाम से भी जाना जाता है। शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण के कारण हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

इंपेयर्ड ग्लूकोज टोलरेंस
यह हाई ब्लड शुगर टाइप 2 से पहले की अवस्था है। अगर समय रहते इसको कंट्रोल नहीं किया गया तो रोग बढऩे का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस श्रेणी के रोगी में डायबिटीज के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।

सेकेंडरी डायबिटीज
जब अन्य रोगों के साथ डायबिटीज की समस्या हो तो उसे सेकंडरी डायबिटीज कहते हैं। इससे अग्नाशय नष्ट हो जाता है, जिससे इंसुलिन का स्राव असामान्य हो जाता है।