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आखिर एक साल तक कहां गायब था डॉक्टर अदील? चीन-तुर्किए कनेक्शन आ रहा सामने

Delhi Blast : दिल्ली धमाकों के बाद गिरफ्तार डॉक्टर अदील का देवबंद से जुड़ाव सामने आया है। अक्सर वह देवबंद आता-जाता रहता था। अदील का तुर्की और चीन कनेक्शन भी सामने आ रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं।

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डॉक्टर अदील की विदेशी यात्राओं की जांच कर रहीं एजेंसियां, PC- PATRIKA

सहारनपुर : दिल्ली विस्फोट मामले में डॉक्टरों के संदिग्ध नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। जांच एजेंसियों ने दो यूट्यूबर्स को हिरासत में ले लिया है, जिनके डिजिटल डिवाइसेस से डॉ. अदील और डॉ. बाबर के साथ कनेक्शन के अहम सबूत बरामद हुए हैं। खुफिया टीमें डॉ. अदील के घर और संपर्कों पर नजर रखे हुए हैं, जबकि देवबंद, जम्मू-कश्मीर और विदेशी यात्राओं का एंगल जांच को नई दिशा दे रहा है। एजेंसियां अब इस 'मेडिकल मॉड्यूल' के अंतरराष्ट्रीय लिंक्स को तोड़ने पर जुटी हैं।

अदील के फोन में मिले कई नंबर

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि डॉ. आदिल अस्पताल से छुट्टी मिलते ही अक्सर देवबंद पहुंच जाता था। वह वहां किससे मिलता था और क्या करता था, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन देवबंद की धार्मिक संवेदनशीलता और दारुल उलूम देवबंद की वैश्विक पहचान को देखते हुए एजेंसियां इस एंगल पर गहन जांच कर रही हैं। अदील के मोबाइल से कश्मीरी छात्रों के कई नंबर मिलने से मामला और गंभीर हो गया है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, ये संपर्क रेडिकल एक्टिविटीज से जुड़े हो सकते हैं, जिसकी तकनीकी फॉरेंसिक जांच जारी है।

डाटा खंगाल रही हैं एजेंसियां

जांच का दायरा बढ़ते ही डॉ. आदिल की चीन और तुर्की यात्राओं का राज सामने आया। स्थानीय स्तर पर इनकी आधिकारिक पुष्टि तो नहीं हुई, लेकिन एजेंसियां उसके पासपोर्ट, इमिग्रेशन डेटा, बैंक ट्रांजेक्शन्स और विदेशी संपर्कों की स्क्रूटनी कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये यात्राएं नेटवर्क को फंडिंग या ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल की गईं हो सकती हैं। NIA और ATS अब इंटरनेशनल एजेंसियों से सहयोग मांग रही हैं ताकि ये लिंक्स पुख्ता हो सकें।

2024 से पहले का डाटा निकाल रही एजेंसियां

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि नवंबर 2024 से पहले के लगभग एक साल तक डॉ. आदिल का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं मिला। वह न तो घर पर था और न ही किसी अस्पताल में ड्यूटी पर। खुफिया एजेंसियां इस 'गायब' पीरियड में उसकी लोकेशन हिस्ट्री, संपर्क लॉग और गतिविधियों की डीप डाइव कर रही हैं। इसी दौरान उसने अंबाला रोड पर एक प्लॉट खरीदा, जहां कथित तौर पर प्राइवेट अस्पताल बनाने की प्लानिंग थी। जांचकर्ताओं को शक है कि यह प्लॉट नेटवर्क के लिए लॉजिस्टिक हब के रूप में इस्तेमाल हो सकता था।

परवेज सहारनपुर में चलाता था क्लीनिक

दिल्ली ब्लास्ट में गिरफ्तार डॉ. शाहीन का भाई डॉ. परवेज सईद अंसारी सहारनपुर में क्लीनिक चला रहा है, और आदिल से उसका संपर्क जांच के केंद्र में है। इस कड़ी ने डॉक्टरों के मॉड्यूल को और विस्तार दिया है। परवेज ने सहारनपुर में तीन मकान बदले टीचर कॉलोनी, नमक मिल और होमगार्ड वाली गली और वह सामाजिक आयोजनों से दूर रहता था। निजी जीवन में पत्नी से विवाद और अलगाव की बातें भी सामने आई हैं, जिससे उसके लो-प्रोफाइल व्यवहार पर सवाल उठे। एजेंसियां अब उसके क्लीनिक और फाइनेंशियल ट्रेल की जांच कर रही हैं।

स्टॉफ से कम बात करता था अदील

मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के निवासी डॉ. आदिल ने सहारनपुर के मानकमऊ के अलावा पैरामाउंट कॉलोनी में भी रहर किया। वह पहले V-ब्रॉस और फिर फेमस मेडिकेयर अस्पताल में काम कर चुका था। दोनों जगह वह ऑटो से आता-जाता था और स्टाफ से न्यूनतम बातचीत करता। इस 'लो-प्रोफाइल' मूवमेंट ने शुरू से ही जांच टीम का ध्यान खींचा, जो अब उसके सोशल सर्कल और आर्थिक स्रोतों पर फोकस कर रही है।

सहारनपुर, देवबंद, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और अब चीन-तुर्की तक फैला यह डॉक्टरों का नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी है। आदिल से जुड़े हर व्यक्ति, उसकी आर्थिक डीलिंग्स, यात्राओं और डिजिटल फुटप्रिंट का तकनीकी विश्लेषण जारी है। दो यूट्यूबर्स की गिरफ्तारी से सोशल मीडिया प्रोपगैंडा का एंगल भी जुड़ गया है।