
सहारनपुर. देवबंद कस्बे में एक लड़की पिछले कई वर्षों से अपने ही घर मे कैद है। परिवार वालों ने इसे जंजीरों से जकड़ रखा है। परिजनों ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि यह लड़की जन्म से ही मंदबुद्धि है। इसलिए इसे जंजीरों में बांधकर रखना पड़ता है। उनका कहना है कि अगर इस लड़की को खुला छोड़ दिया जाएगा तो यह कहीं भी जा सकती है और कुछ भी कर सकती है। इसी कारण से जंजीरों में बांधकर रखा गया है।
योगी जी हमारी बेटी को पागल खाने भिजवा दो
मानवीय संवेदनाओं को झक-झोरकर रख देने वाली इस घटना की जानकारी मिलते ही पत्रिका टीम इस लड़की के घर पहुंची और इस परिवार से बेटी को इस तरह से बांधकर रखने की वजह पूछी तो परिवारवालों ने जो कहा वह और भी हैरान कर देने वाला था। परिवार के सदस्यों ने कहा कि वह अपनी बेटी को पागलखाने भेजना चाहते हैं और इसके लिए भी उनके पास पैसे नहीं हैं। वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाते हैं कि वह उनकी बेटी को पागलखाने भिजवा दें। परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे कर्ज में हैं बेटी का काफी इलाज कराया, लेकिन उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं होती और अब वे चाहते हैं कि उनकी बेटी को पागल खाने भेज दिया जाए।
देवबंद के मोहल्ला कायस्थवाड़ा में रहता है परिवार
देवबन्द नगर के मोहल्ला कायस्थवाड़ा निवासी मनव्वर रेहड़ा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता है। मनव्वर के आठ बच्चे हैं, जिनमें सबसे छोटा 8 वर्ष का बेटा व 7 बेटी हैं। मनव्वर की सबसे बड़ी बेटी तबस्सुम को बचपन से ही दौरे पड़ने के कारण दिमागी संतुलन खो चुकी है। तबस्सुम की दादी बताती हैं कि बचपन से मां-बाप तबस्सुम को लेकर इलाज के लिये जगह-जगह डॉक्टरों के पास गए, मगर कोई सफलता नहीं मिल सकी। इलाज के दौरान खर्च हुई रकम के कारण मनव्वर कर्ज के बोझ तले डूब गया। ऐसे में एक तरफ बच्ची के इलाज की चिंता दूसरी ओर परिवार के पालन पोषण की चिंता से पूरी तरह परेशान है। अब बढ़ती उम्र को देखते हुए परिजन तबस्सुम को जंजीर से बांधने को मजबूर हो गए हैं। अब सभी जगह से निराश होकर परिजनों ने मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है कि वह उनकी बच्ची का इलाज कराने के लिए उसे किसी अच्छे हॉस्पिटल या पागलखाने में भर्ती करा दिया जाए।
22 वर्षीय तबस्सुम को मकान की छत पर रखा जाता है जंजीर से बांधकर
तबस्सुम अब 22 वर्ष की हो चुकी है। परिजन उसे छत पर जंजीर से बांधकर रखते हैं। जब उसकी दादी जरीना से बात की तो उन्होंने बताया कि उनकी पोती को बचपन में दौरे पड़ने के कारण वह अपना मानसिक संतुलन खो चुकी थी, जिसका काफी इलाज कराने के बाद भी कोई सफलता नहीं मिली।
वहीं तबस्सुम के चाचा शाह नवाब ने बताया कि हम इस लड़की की तरफ से हर वक्त चिंतित रहते हैं। क्योंकि अब यह बालिग हो गई है और आज जब सझदार महिलाएं ही सुरक्षित नहीं हैं तो ऐसे में तबस्सुम को खुला रखना सही नहीं है। उनका यह भी कहना है कि मां-बाप अपने बच्चों को सीने से लगाते हैं, मगर वक्त और हालात के कारण एक मां-बाप को अपनी बच्ची को जंजीरों में बांधना पड़ रहा है।
Published on:
12 Dec 2017 09:24 am
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