देवबंद. उत्तराखण्ड हाईकोर्ट की ओर से फतवों पर बैन लगाने पर उलेमा ने आपत्ति जताई है। देवबंद के उलेमा ने कोर्ट के फैसले को शरीयत में दखल करार दिया है। इसके साथ यह भी कहा है कि कोर्ट के आदेश से देवबन्दी उलेमा नहीं सहमत है। दरअसल, वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसल में फतवों को इस्लामिक शरई मशवरा मानते हुए कहा था कि किसी के सलाह देने रोक नहीं लगायी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश को आधार बनाते हुए देवबंद के मुफ्ती अहमद गोड ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश को शरीयत में हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट को गम्भीरता से फैसला लेना चाहिए। क्योंकि, हमें संविधान ने जो आजादी दी है। इस तरह के फैसले उस आजादी पर रोक है । गौरतलब है कि इससे पहले दारुल-उलूम देवबंद के प्रवक्ता ने भी उत्तराखंड हाईकोर्ट के इस फैसले को शरीयत में दखल के साथ ही संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था।