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अजब-गजब; स्मार्ट सिटी सहारनपुर के अस्पताल में वेंटिलेटर ताे हैं लेकिन उन्हे चलाने वाले डॉक्टर नहीं हैं

स्मार्ट सिटी सहारनपुर के जिला अस्पताल में छह वेंटीलेटर हैं लेकिन एक भी वेंटीलेटर सिर्फ इसलिए नहीं चल पाता क्याेकि उन्हे वाला चलाने वाला प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है।

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वेंटीलेटर

वेंटीलेटर

सहारनपुर। जिले में बुखार से आए दिन लोगों की मौत हो रही हैं। गंभीर रोगियों को सहारनपुर से दूसरे राज्य उत्तराखंड या फिर हरियाणा रेफर किया जाता है और इसका कारण यह है कि जिला अस्पताल में वेंटिलेटर चलाने वाला स्टाफ नहीं है।
सहारनपुर के जिला अस्पताल में पिछले 6 माह से वेंटिलेटर रखे हैं लेकिन इन्हे चलाने के लिए स्टाफ नही है जस कारण इन वेंटीलेटर का लाभ सहारनपुर की जनता को नहीं मिल पाता।
जिला अस्पताल प्रबंधन का यही कहना है कि शासन को बार-बार प्रस्ताव भेजा गया लेकिन वेंटिलेटर के लिए अभी तक स्टाफ नहीं मिला। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सहारनपुर के जिला अस्पताल में एक दो नहीं बल्कि छह-छह वेंटिलेटर हैं। पांच वेंटिलेटर ट्रॉमा सेंटर में हैं और एक ऑपरेशन थिएटर में इंस्टॉल किया गया है लेकिन यह सभी छह वेंटिलेटर सिर्फ नाम के हैं। इनमें से कोई भी वेंटिलेटर इसलिए नहीं चलता क्योंकि जिला अस्पताल के पास प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है जो इन वेंटीलेटर को ऑपरेट कर सके, इन वेंटिलेटर को चला सके। ऐसे में हालात यह है कि गंभीर रोगियों को शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया जाता है या फिर उन्हें दूसरे राज्य हरियाणा के पीजीआई और देहरादून के जोली ग्रांट में रेफर कर दिया जाता है।

जनवरी माह से सहारनपुर में अब तक सड़क हादसों में 270 लोगों की मौत अब तक हो चुकी है। इनमें से अधिकांश रोगी गंभीर थे जिन्हें रेफर कर दिया गया था। ऐसे में यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि अगर जिला अस्पताल में लोगों को बेहतर इलाज मिले वेंटिलेटर की सुविधा हो तो कई ऐसे लोगों की जान बचाई जा सकती हैं जिनकी मौत सहारनपुर से रेफर होने के बाद रास्ते में हाे जाती है।


जिला अस्पताल के अधीक्षक सुनील कुमार वार्ष्णेय का कहना है कि अस्पताल में वेंटिलेटर तो हैं लेकिन उनके चलाने के लिए एक्सपर्ट प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है।उनका यह भी कहना है कि, इसके लिए कई बार शासन को लिखित में प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है।