
surbhi
सहारनपुर। किसी की मुस्कुराहटों पे हाे निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार, ''जीना इसी का नाम है''
हिंदी फिल्म का यह गीत तो आपने सुना ही हाेगा। आज हम आपकी मुलाकात एक ऐसी Social Worker से कराने जा रहे हैं जिन्हाेंने इन पंक्तियों काे आत्मसार कर लिया। बेजुबां जानवरों के लिए अपनी ख्वाईश त्याग दी और IAS की तैयारी छोड़, उन बेजुबां-बेसहारा जानवरों की मदद करना शुरू कर दिया जिन्हे लाेग सड़क किनारे तड़प-तड़प कर मरने के लिए छाेड़ देते हैं।
हम बात कर रहे हैं सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट पंकज वर्मा की पत्नी ''सुरभि'' की। सुरभि की प्राथमिक पढ़ाई बलिया से हुई और आगे की पढ़ाई बनारस से। IAS बनने का सपना संजोएं उन्हाेंने पूरी मेहनत के साथ तैयारी शुरू की लेकिन इसी बीच उनके साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने उनके जीवन की दिशा काे ही बदल दिया। सुरभि बताती हैं कि उनके पास एक डॉगी था जिसकी अंजान बीमारी के चलते माैत हाे गई। जब उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने प्यारे डॉगी (पप्पी) काे मरते हुए देखा ताे इस घटना ने उनके दिल काे झकझोर कर रख दिया। इस घटना के बाद सुरभि ने ठान लिया कि बेजुबां जानवरों के लिए काम करेंगी और उनका दर्द बाटेंगी।
यह घटना करीब तीन साल पहले की है। इस घटना के बाद सुरभि ने बेजुबां जानवरों की मदद के लिए अपने कदम आगे बढ़ाए ताे फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज तक वह 40 से अधिक घायल जानवरों काे उपचार दिला चुकी हैं। सुरभि सिर्फ जानवरों पर ही काम नहीं कर रही, आपको यह जानकर हैरानी हाेगी कि वह चाईल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं दाे ऐसी बच्चियों काे स्कूल तक पहुंचाया जाे देख नहीं सकती थी और उन बच्चियों से भीख मंगवाई जा रही थी।
सुरभि (Surbhi) के ही अनुसार तीन वर्षों में वह करीब 400 ऐसी बच्चियों का स्कूल में एडमिशन करा चुकी हैं जिन्हे उनके परिवार वाले ही स्कूल नहीं नहीं भेज रहे थे। इतना ही नहीं दस से अधिक स्वयं सहायता समूह का गठन कराते हुए सैकड़ों महिलाओं काे सशक्त बना चुकी हैं। बलिया, वाराणसी और बिजनौर के अलावा सहारनपुर में भी वह कई बच्चियों काे स्कूल की राह दिखा चुकी हैं। सुरभि कहती हैं कि ऐसा करने की प्रेरणा और साहस उन्हे अपने पति पंकज वर्मा (सिटी मजिस्ट्रेट सहारनपुर) से मिलता है।
Published on:
01 Nov 2019 06:19 pm
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