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Sugarcane juice : कोल्ड ड्रिंक की तरह मिलेगा गन्नें का जूस! वैज्ञानिक करेंगे शोध, किसानों की होगी चांदी

Sugarcane juice : यूपी सरकार चाहती है कि गन्ने के रस को पैक जूस बनाकर बेचा जाए। इस शोध के लिए यूपी सरकार आर्थिक मदद भी करने को तैयार है।

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Sugarcane juice will sold like cold drink Scientists do research farmers will make money

प्रतीकात्मक फोटो

sugarcane juice : गन्ने के रस के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। अगर योजना सफल हुई तो वह दिन दूर नहीं जब आप पेप्सी, थम्सअप और कोका-कोला की तर्ज पर गन्ने का रस बंद टिन या बोतल में पी सकेंगे। इसके लिए आईआईटी रुड़की ( IIT Roorkee ) के वैज्ञानिक शोध करेंगे कि किस तरह से गन्ने के रस को कोल्ड ड्रिंक की तर्ज पर पैक करके लंबे समय तक पीने योग्य बनाया जा सकता है।

किसान ने दिया ( sugarcane juice ) का आइडिया !

आप सोच रहे होंगे कि गन्ने के रस को पैकेट में बंद करके बेचने का ख्याल कहां से आया ? तो जान लीजिए कि आईआईटी रुड़की के सहारनपुर कैंपस में 13 अप्रैल को संवाद एवं समाधान कार्यक्रम रखा गया था। इस कार्यक्रम में उद्यमी, किसान और वैज्ञानिकों को बुलाया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूपी के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह थे। वैसे तो यह कार्यक्रम पॉपुलर और यूकेलिप्टिस की फसलों को लेकर था। यहां इस बात पर संवाद होना था कि किस तरह से इस खेती से जुड़े किसानों की इनकम को बढ़ाया जाए और सहारनपुर में प्लाइवुड इंडस्ट्री की स्थापना हो सके लेकिन यहां एक किसान ने बेसिक सवाल उठाया। किसान ने कहा कि वेस्ट यूपी में सबसे अधिक गन्ने की फसल होती है। अगर वैज्ञानिक मिलकर कोई ऐसा फॉर्मुला तैयार कर लें कि गन्ने के रस को पैक जूस के रूप में बेचा जा सके तो किसानों की बल्ले-बल्ले हो जाएगी और उद्योग के क्षेत्र में भी नए रास्ते तैयार हो जाएंगे।

मुख्य सचिव ने कहा शोध पर खर्च करेगी यूपी सरकार

इस किसान ने भरे प्रोग्राम में जब ये सवाल उठाया तो मुख्य सचिव को भी बात समझ आ गई। उन्होंने इसी प्रोग्राम के मंच से कहा कि आईआईटी रुड़की इस ओर ध्यान दे। यह भी कहा कि अगर कोई वैज्ञानिक इस पर शोध करते हैं तो यूपी सरकार से इस शोध के लिए वह आर्थिक मदद भी दिलवाएंगे। अब आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक इस प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। यह जानने की कोशिश की जा रही है कि महज दो मिनट में खराब हो जाने वाले गन्ने के रस को किस तरह से लंबे समय तक पीने योग्य बनाया जा सकता है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द इस पर शोध शुरू हो जाएगा। शोध सफल हुआ तो वेस्ट के किसानों की बल्ले बल्ले हो जाएगी। किसानों को फिर दूसरी फसलों और विकल्पों के बारे में नहीं सोचना होगा।

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