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कोरोना काल में सस्ता हो गया गेहूं, गिर गए दाम

कई वर्षों में पहली ऐसा हुआ है कि ऑफ सीजन में गेहूं के दाम कम हाे गए हैं थोक बाजार में समर्थन मूल्य से भी कम हाे गए गेहूं के दाम

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बदहाल किसान, रजिस्ट्रेशन के बाद भी 1.30 लाख किसानों से गेहूं नहीं खरीद पाई सरकार

बदहाल किसान, रजिस्ट्रेशन के बाद भी 1.30 लाख किसानों से गेहूं नहीं खरीद पाई सरकार

सहारनपुर ( Saharanpur ) कोरोना संक्रमण ( COVID-19 virus )
के खतरे को देखते हुए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान देश में बहुत सारी घटनाएं पहली बार घटी। इसी क्रम में ऑफ सीजन होने के बावजूद गेहूं ( wheat ) के दाम में भी गिरावट आई है। ऐसा पहली बार हुआ है जब ऑफ सीजन में गेहूं के दाम समर्थन मूल्य से भी नीचे पहुंच गए हैं। इसके पीछे लॉक डाउन के दौरान महीने में दो-दो बार राशन वितरण को वजह माना जा रहा है।


इन दिनों बढ़ते हैं गेहूं के दाम ( wheat prices )
वर्तमान समय गेहूं की फसल का नहीं है। ऐसे में हर वर्ष इन दिनों गेहूं के दाम में इजाफा होता है लेकिन इस बार ट्रेड का ग्राफ उल्टा हो गया है। मंडी में गेहूं का भाव सरकार की ओर से घोषित समर्थन मूल्य 1925 रुपए प्रति कुंतल से भी नीचे पहुंच गया है। गेहूं व्यापारी गेहूं व्यापारी राजीव कक्कड़ के अनुसार वर्तमान में मंडी में गेहूं का थोक मूल्य 1650 से 1725 प्रति क्विंटल आ गया है।

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गेहूं व्यापारी राजेश तायल का कहना है कि ऐसा पहली बार देख रहे हैं। पिछले कई वर्षों में ऐसा नहीं हुआ। इसके पीछे लॉक डाउन के दौरान महीने में दो-दो बार गेहूं वितरण किए जाने को वजह बताया जा रहा है। वर्तमान में गेहूं का भाव 1725 रुपये प्रति कुंतल तक है। इन दिनों आटा चक्की वाले गेहूं खरीदते हैं। इससे मांग बढ़ती है। इसकी वजह यह है कि, इन दिनों गेहूं का स्टोरेज खत्म हो जाता है। ऐसे में आटे की मांग बढ़ जाती है और आटे की मांग बढ़ने के साथ ही गेहूं के दाम में भी बढ़ोतरी होती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है।

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इस बार लोग कम संख्या में राशन खरीद रहे हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि लोगों ने लॉकडाउन से पहले अपने घरों में राशन भर लिया था और सरकार ने भी सस्ती दरों पर महीने में दो दो बार लोगों को राशन दिया। लोगों के पास इतना राशन हाे गया है कि कुछ लाेग गेहूं छोटे दुकानदारों काे बेचकर उनसे बदले में अपनी आवश्यकता की और चीजें ले रहे हैं। यही कारण है कि इस बार गेहूं का भाव नीचे आ गया है।