
नफरत के दौर में मोहब्बत की मिसाल | Image - FB/@ziaurrahmanbarq
Ziyaur Rahman Barq Statement: संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आई तीन घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्हें ‘इंसानियत की जीत’ करार दिया है। उन्होंने इन घटनाओं को भारत की साझा संस्कृति और भाईचारे की जीवंत मिसाल बताया।
सोशल मीडिया पर साझा अपने संदेश में सांसद बर्क ने केंद्र सरकार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों की नीतियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि मौजूदा दौर में नफरत फैलाने वाली राजनीति के बीच आम लोगों की संवेदनशीलता ही देश को जोड़कर रखे हुए है।
सांसद बर्क ने सबसे पहले कोटद्वार की घटना का उल्लेख किया, जहां एक मुस्लिम बुजुर्ग की दुकान पर कथित हमले के दौरान मोहम्मद दीपक नामक युवक पीड़ित के सामने दीवार बनकर खड़ा हो गया। बर्क के अनुसार, जब भीड़ का गुस्सा भड़क रहा था, तब दीपक ने बिना किसी डर के मानवता का साथ दिया और पीड़ित की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि नफरत फैलाने वालों की सोच जमीन पर हमेशा हारती है, क्योंकि आम नागरिक आज भी इंसानियत को सबसे ऊपर मानते हैं।
दूसरी घटना लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़ी बताई गई, जहां वर्षों से नमाज पढ़े जाने वाली जगह पर ताला लगाए जाने के बाद छात्र खुले में नमाज अदा करने लगे। इस दौरान वहां मौजूद हिंदू छात्रों ने मुस्लिम छात्रों की सुरक्षा के लिए घेरा बनाया और बाद में उनके साथ रोजा इफ्तार में भी शामिल हुए।
बर्क ने कहा कि कैंपस में दिखाई दी यह एकता न केवल सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि युवा पीढ़ी नफरत की राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत को चुन रही है।
तीसरी घटना राजस्थान से सामने आई, जहां एक बीजेपी नेता द्वारा मुस्लिम महिलाओं को कंबल देने से इनकार करने पर वहां मौजूद हिंदू महिलाओं ने विरोध में अपने कंबल लौटा दिए। सांसद बर्क ने इस कदम को साहसिक बताते हुए कहा कि यह घटना बताती है कि जब नफरत की राजनीति कमजोर पड़ती है, तब आम लोग सामाजिक न्याय और बराबरी के पक्ष में खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की यह एकजुटता समाज में भरोसा और संवेदनशीलता को मजबूत करती है।
सांसद बर्क ने कहा कि ये घटनाएं उसी भारत की झलक दिखाती हैं जिसका सपना महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने देखा था। उनके मुताबिक, भारत की असली पहचान विविधता में एकता है, जहां धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर लोग एक-दूसरे के लिए खड़े होते हैं।
अपने बयान के अंत में सांसद बर्क ने नफरत फैलाने वालों से अपील की कि वे समाज को तोड़ने में जितनी ऊर्जा लगाते हैं, उसका आधा भी अगर रोजगार, रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर लगा दें, तो देश की तस्वीर बदल सकती है। उन्होंने कहा कि सच्चा विकास नफरत से नहीं, बल्कि इंसानियत, समानता और सामाजिक न्याय से आता है।
Published on:
24 Feb 2026 04:48 pm
