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Birthday Special: इस मंदिर ने बदला था Mulayam Singh Yadav का भाग्‍य, उनके परिवार का जो भी सदस्‍य चुनाव लड़ा, जीत गया

Highlights Sambhal से दो बार सांसद रह चुके हैं Mulayam Singh Yadav प्रो. राम गोपाल यादव भी Sambhal से जीत चुके हैं लोकसभा चुनाव कैला देवी के मंदिर का यादवाें के लिए काफी महत्‍व है

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संभल। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के संस्‍थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का शुक्रवार को जन्‍मदिन (Birthday) मनाया गया। मुलायम सिंह के 81वें जन्‍मदिन पर वेस्‍ट यूपी (West UP) के भी कई जनपदों में सपाइयों ने केक काटा और गरीबों को फल वितरित किए। इस मौके पर हम आपको यादव परिवार के संभल प्रेम के बारे में बताते हैं। यादव परिवार की संभल (Sambhal) के कैला देवी मंदिर में काफी आस्‍था है।

यदुवंश की कुलदेवी माना जाता है कैला देवी को

हम बात कर रहे हैं संभल स्थित कैला देवी मंदिर की। कैला देवी के मंदिर का यादवाें के लिए काफी महत्‍व है। इनको यदुवंश की कुलदेवी माना जाता है। नवरात्र (Navratri) में इस मंदिर में भक्‍तों की सैलाब उमड़ता है। 22 नवंबर 1939 को इटावा के सैफई में जन्‍मे मुलायम सिंह यादव संभल से दो बार सांसद रह चुके हैं। इसके बाद उन्‍होंने अपने भी अपने भाई राम गोपाल यादव को भी यहां से सांसद बनवाया। कहा जाता है क‍ि मुलायम सिंह यादव का भाग्‍य कैला देवी मंदिर ने बदला था।

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यादव परिवार का रहा है दबदबा

मुस्लिम और यादव बहुल संभल सीट पर यादव परिवार का दबदबा रहा है। लोग इसे कैला देवी का ही आशीर्वाद मानते हैं। 1992 में सपा की स्‍थापना करने वाले मुलायम सिंह यादव ने यहां शुरू में ही अपनी ताकत दिखा दी थी। 1998 में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी (Mainpuri) और संभल से चुनाव लड़ा था। उन्‍होंने दोनों ही सीटों पर जीत हासिल की थी। संभल से उन्‍होंने से ज्यादा डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। इसके बाद मुला‍यम सिंह ने संभल को नहीं छोड़ा।

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पिछले लोकसभा चुनाव में भी जीती सपा

1999 में हुए लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव दोबारा संभल से चुनाव मैदान में उतरे। इसमें भी उनका दबदबा कायम रहा और वह फिर संभल से सांसद बने। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्‍होंने संभल से अपने भाई प्रोफेसर राम गोपाल यादव को चुनाव लड़ाया। इस चुनाव में राम गोपाल यादव रिकॉड मतों से जीते थे। पिछले लोकसभा चुनाव में भी यहां से यादव परिवार के किसी सदस्‍य को लड़ाने का सुझाव रखा गया था लेकिन डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क को टिकट दे दिया गया। 2019 के चुनाव में भी यह सीट सपा ने ही जीती थी।