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ब्लाॅक प्रमुख की कुर्सी थी खतरे में, इस अधिकारी के पास आया एक काॅल और फिर अविश्वास प्रस्ताव स्थगित कर दिया

  बीडीसी ने जमकर किया हंगामा, दिया धरना
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no confidence against Nawan Palika chairmen

17 councilors motion of no confidence against Nawan Palika chairmen

एक साल में दुबारा प्रमुख के खिलाफ अविश्वास को संतकबीरनगर जिला प्रशासन ने रोक दिया है। बहस की तिथि तय होने और बीडीसी के पहुंचने के बाद अचानक से प्रशासन के इस निर्णय के खिलाफ महिला बीडीसी ने जमकर हंगामा किया। काफी देर तक धरना दिया। उधर, इस प्रकरण में प्रशासन का कहना है कि एक साल में दुबारा अविश्वास लाने का प्राविधान नहीं है। इसी वजह से अविश्वास प्रस्ताव पर बहस पर रोक लगा दी गई है। जबकि विपक्ष का कहना है कि प्रमुख अपने अविश्वास के खिलाफ हाईकोर्ट गए थे लेकिन उनको राहत नहीं मिली। पर प्रशासन से मिलीभगत से अविश्वास रूकवा लिया।
खलीलाबाद ब्लाॅक प्रमुख के खिलाफ चार जुलाई को सदस्यों ने डीएम का शपथ पत्र देकर अविश्वास प्रस्ताव दिया था। सदस्यों की बात और शपथ पत्र पर गौर करते हुए डीएम संतकबीरनगर ने एसडीएम सदर की देखरेख में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए 24 जुलाई को तिथि तय किया था। मंगलवार को 102 बीडीसी में 82 बीडीसी अविश्वास पर चर्चा के लिए ब्लाॅक सभागार पहुंचे थे। चर्चा शुरू हुई थी कि एसडीएम सदर के पास एक फोन आया। फोन पर बात करने के बाद अविश्वास प्रस्ताव पर रोक लगा दिया गया। बताया गया कि प्रमुख मनोज राय ने प्रार्थना पत्र देकर यह बताए हैं कि एक साल पहले भी उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया था लेकिन एक भी सदस्यों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। प्रशासन के अनुसार पंचायती राज एक्ट के मुताबिक एक साल में दो बार अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा स्थगित किए जाने के बाद बीडीसी सदस्य हंगामा करने लगे। पुलिस व बीडीसी में काफी देर तक नोकझोंक भी हुई। महिला सदस्यों ने धरना दिया। लेकिन बात नहीं बनी। विपक्षी सदस्यों का आरोप है कि प्रशासन की मिलीभगत से ऐसा किया गया है। प्रमुख की कुर्सी बचाने के लिए वे लोग ऐसा कर रहे हैं क्योंकि प्रमुख को जब हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली तो वे ऐसा कराए हैं।