। रेलवे स्टेशन पर अब 15 दिन और सतना नदी से जलापूर्ति संभव हो पाएगी। क्योंकि नदी में 15 दिन का स्टॉक ही शेष बचा है। इसके बाद पानी का हाहाकार मचने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। अफसरों ने जलसंकट की आहट को भांपते हुए पहले से प्लान तैयार करने पर मंथन शुरू कर दिया है।
अफसरों ने दावा किया है, अभी रोजाना 20 टैंकर पानी मंगा रहे हैं। अगले माह में सतना नदी से यदि जलापूर्ति ठप होती है तो 20 की जगह रोजाना 60 टैंकर मंगाकर स्टेशन परिसर पर जलापूर्ति कराई जाएगी। प्रचंड गर्मी का कहर लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों पर टूट रहा है। यात्रियों को प्लेटफार्म पर पानी न मिलने से मायूसी हो रही है। रेलवे स्टेशन पर दिन पर दिन पानी का प्रवाह धीमा होना शुरू हो गया है। सतना नदी आधे से ज्यादा सूख चुकी है। नदी से स्टेशन परिसर तक बोरवेल के जरिए होने वाली जलापूर्ति दम तोड़ गई है। इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों की मानें तो नदी से अब महज 15 दिन तक और जलापूर्ति संभव है, इसके बाद कोई गुंजाइश नहीं बन रही। गर्मी के तेवर इसी तरह रहे निश्चित ही जलसंकट से निपटना चुनौती बन जाएगा।