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कथूरिया के खिलाफ 185 पन्नों का चालान लोकायुक्त ने दो साल बाद किया पेश

दो साल पहले 10 लाख का सोना सहित 12 लाख नकद लेते पकड़े गए थे तत्कालीन निगमायुक्त

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185 pages invoice against Kathuria

185 pages invoice against Kathuria

सतना. चिकित्सक दंपती से 10 लाख का सोना सहित 12 लाख रुपए नकद लेते पकड़े गए तत्कालीन निगमायुक्त सुरेंद्र कुमार कथुरिया के खिलाफ लोकायुक्त ने गुरुवार को दो साल बाद चालान पेश किया। 185 पन्नों का यह चालान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 के तहत रविंद्र प्रताप सिंह की विशेष कोर्ट में पेश किया। चालान पेश करने में देरी की वजह अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलना बताया जा रहा। अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 21 जूून की तारीख तय की है। अभियोजन की ओर से एडीपीओ फखरुद्दीन ने न्यायालय में पक्ष रखा।

अभियोजन प्रवक्ता फखरुद्दीन ने बताया, नगर पालिक निगम सतना के तत्कालीन निगमायुक्त सुरेन्द्र कुमार कथूरिया को लोकायुक्त टीम ने 26 जून 2017 की दोपहर १२ लाख रुपए नकद और 10 लाख का सोना बतौर रिश्वत लेते पकड़ा था। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी कथूरिया ने भवन अनुज्ञा की शर्तों का उल्लंघन करते हुए किए गए निर्माण पर कार्रवाई न करने के लिए 50 लाख रुपए की रिश्वत नर्सिंग होम संचालक से मांगी थी। इसमें 40 लाख रुपए नकद और 10 लाख रुपए का सोना मांगा गया था। सौदा तय होने के बाद जब मामला लोकायुक्त रीवा में पहुंचा तो रिश्वत की पहली किस्त के साथ ही निगमायुक्त कथूरिया को उनके सिविल लाइन स्थित निमायुक्त आवास पर ही पकड़ लिया था।


चिकित्सक दंपती की शिकायत पर कार्रवाई

भरहुत नगर में अस्पताल के साथ निवास बनाकर रह रहे राजकुमार अग्रवाल को नगर पालिक निगम से नोटिस दिया गया था। नोटिस में भवन अनुज्ञा के अनुसार निर्माण न करने और आवासीय परिसर में अस्पताल संचालित करने पर कार्रवाई के लिए कहा गया था। कार्रवाई से बचने के लिए जब राजकुमार अग्रवाल ने नगर निगम आयुक्त कथूरिया से संपर्क किया तो उन्होंने ५० लाख रुपए की रिश्वत मांगी। शिकायतकर्ता अग्रवाल का आरोप था कि 50 लाख रुपए पूरे न होने पर 40 लाख रुपए नकद और 10 लाख रुपए का सोना देने पर सौदा तय किया था।

आवास से यह मिला था
लोकायुक्त में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद शिकायतकर्ता डॉ राजकुमार अग्रवाल ने 12 लाख रुपए नकद और 10 लाख रुपए का तथाकथित सोना लोकायुक्त टीम को लाकर दिया। इसे कैमिकल लगाने के बाद शिकायतकर्ता को वापस दे दिया गया। डॉ अग्रवाल निगमायुक्त के निवास पहुंचे और कुछ देर बाद ही वह शोर करते हुए बाहर आए। इस पर वहां पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने दबिश दी। टीम के साथ राजकुमार की पत्नी डॉ. सुचित्रा अग्रवाल भी थीं। टीम ने वहां से 330 ग्राम सोना (सोने के दो बिस्किट, सोने का एक फेंगसुई मेढ़क) और पांच-पांच सौ रुपए के नोट जो 12 लाख रुपए थे, बरामद किए थे।