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न्यायिक अभिरक्षा से भागे तीन आरोपियों को सश्रम कारावास

जेएमएएफसी कोर्ट का फैसला

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Three prisoners fleeing judicial custody, rigorous imprisonment

Three prisoners fleeing judicial custody, rigorous imprisonment

सतना. जमानत का आवेदन खारिज होने के बाद न्यायिक अभिरक्षा से भागे तीन आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी उमेश कुमार पटेल की कोर्ट ने एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। तीनों अभियुक्तों को एक-एक हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया गया। अभियोजन की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी हरिकृष्ण त्रिपाठी ने कोर्ट में पक्ष रखा।

अभियोजन प्रवक्ता फखरुद्दीन ने बताया कि किशोरी बाई ने अभियुक्त चंद्रिका प्रसाद गर्ग, भोलादीन बागरी, सुंदर लाल सिंह सहित अन्य के खिलाफ परिवाद दायर किया था। उसे संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किया। इसके बाद तत्कालीन न्यायिक मजिस्टे्रट प्रथम श्रेणी नोरिन सिंह की कोर्ट में २९ दिसंबर २००० को चंद्रिका प्रसाद गर्ग, भोलादीन बागरी, सुंदरलाल सहित अन्य आरोपी उपस्थित हुए। आरोपी हीरालाल और श्याम सिंह की ओर से कोर्ट में जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया। लेकिन, कोर्ट ने आरोपियों के जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।

न्यायिक अभिरक्षा से भागे

इसकी जानकारी लगते ही चंद्रिका प्रसाद गर्ग, भोलादीन बागरी, सुंदर लाल और हरेश्वर शर्मा न्यायिक अभिरक्षा से भाग खड़े हुए। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ थाना सिटी कोतवाली को आइपीसी की धारा 224 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध करने के आदेश दिए। विचारण के दौरान एक अभियुक्त हरेश्वर शर्मा की मृत्यु होने से कार्रवाई समाप्त की जा चुकी है। अन्य आरोपियों के खिलाफ 31 जनवरी 2001 को न्यायालय में चालान पेश किया गया।

न्यायालय ने एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई

विचारण के दौरान न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों चंद्रिका प्रसाद गर्ग पिता राममिलन गर्ग (70), भोलादीन बागरी पिता कल्लू प्रसाद बागरी (70) और सुंदरलाल सिंह पिता बैजनाथ सिंह (75) सभी निवासी ग्राम डाली थाना कोठी के खिलाफ अपराध प्रमाणित होना पाया। न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को आइपीसी की धारा 224 के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अर्थदंड का व्यतिक्रम होने पर एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगताने का भी आदेश दिया।