
5 deaths due to wrong treatment in 20 days
सतना। जिले में अपंजीकृत चिकित्सकों का इलाज जानलेवा साबित हो रहा है। इनके गलत इलाज से मरीज दम तोड़ रहे हैं। बीते 20 दिनों में 5 मरीजों की मौत हो चुकी है। मामले की जानकारी कलेक्टर, सीएमएचओ सहित अन्य अधिकारियों को भी है पर किसी के खिलाफ कार्रवाई तो दूर जिम्मेदार निरीक्षण तक की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं। एेसा ही एक मामला उचेहरा में सोमवार को सामने आया।
अंपजीकृत चिकित्सक के चंगुल में फंसकर धनिया गांव निवासी विमला पति प्रहलाद सिंह ने अपनी बुखार पीडि़त 10 माह की मासूम का मैहर मार्ग स्थित निजी क्लीनिक में इलाज कराया। इलाज के बाद भी मासूम को आराम नहीं मिला। उल्टे तबीयत गंभीर हो गई तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। तब तक काफी देर हो चुकी थी। ड्यूटी डाक्टर ने जांच के बाद मासूम को मृत घोषित कर दिया।
मिलीभगत की कीमत मौत
जिले में 20 दिनों में गलत इलाज से 5 मरीज दम तोड़ चुके हैं पर किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। उल्टे जिला प्रशासन सहित स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार जानकारी होने के बाद भी मौन साधे हुए हैं। मिलीभगत के चलते कार्रवाई तो दूर अपंजीकृत चिकित्सकों की क्लीनिक में झांकने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं। खामियाजा पीडि़तों को जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
शिकायत के बाद भी जिम्मेदार मौन...
रामपुर बाघेलान और नागौद के मामले में पजिनों ने गलत इलाज से हुई मौत की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी पर किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। जबकि जिलेभर में बड़ी संख्या में लोग बिना डिग्री, डिप्लोमा बेखौफ इलाज कर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
पहले हो चुकी मौत पर कोई कार्रवाई नहीं
1- जसो थाना क्षेत्र के रीछुल गांव निवासी रामसनेही सिंगरौल पैर में असहनीय दर्द से पीडि़त थे। ग्रामीणों ने बताया कि रीछुल गांव का गनपत गो-सेवा का प्रशिक्षण लिया है। लोगों का भी इलाज करता है। इस पर वृद्ध 20 सितंबर को गो-सेवक के पास पहुंचा तो उसने इंजेक्शन लगाया। इसके बाद वृद्ध की हालत गंभीर हो गई। अस्पताल पहुंचने के पहले दम तोड़ दिया।
2- सलैया ग्राम पंचायत के लदेरा गांव निवासी एक बच्चे की तबीयत खराब हुई तो परिजनों ने 23 सितंबर को गांव में ही अपंजीकृत डॉक्टर अवधेश विश्वकर्मा को दिखाया। उसके इलाज से बच्चे की तबीयत और ज्यादा खराब हो गई। बच्चे की स्थिति ज्यादा खराब होने पर परिजन एक बार फिर अपंजीकृत डॉक्टर के पास पहुंचे, तो उसने इलाज से मना कर दिया। अन्य डॉक्टर को दिखाने को कहा और क्लीनिक बंद कर गायब हो गया। परिजन बच्चे को लेकर बिरसिंहपुर पहुंचे। वहां डॉ. पीसी विश्वकर्मा को दिखाया। उन्होंने स्थिति गंभीर देख इलाज शुरू किया। इसी दौरान बच्चे की मौत हो गई।
3- रामपुर बाघेलान के डेगरहट गांव निवासी प्रिंस आदिवासी (3) बुखार से पीडि़त था। परिजनों ने 22 सितंबर को अंपजीकृत चिकित्सक डॉ पवन तरफदार की क्लीनिक में इलाज कराया। बच्चे के पूरे शरीर में गलत इलाज से फफोले निकल आए थे। कुछ दिन बाद मौत हो गई।
Published on:
09 Oct 2018 12:00 pm
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