
Dead body प्रतीकात्मक फोटो
सतना. एक तरफ सरकारें चिल्ला चिल्ला कर दावा कर रहीं कि दूर-दराज से आने वाले लोगों की पूरी हिफाजत की जा रही है। ट्रेन, बस जो भी हो हर किसी की सहूलियत का पूरा खयाल रखा जा रहा है। लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। बसें जहां मन आ रहा वहीं श्रमिकों को छोड़ कर भाग जा रही हैं। खाना-पानी नसीब नहीं हो रहा। अब तो श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में हो रही मौत ने सभी को दहला दिया है। खास तौर से महाराष्ट्र व गुजरात से आने वाली ट्रेनों में हाल के दिनो में हुई मौत से तो श्रमिक भी डरने लगे हैं। हालांकि रेल प्रशासन का दावा है कि वह यात्रियों की पूरी देख-भाल कर रहा है।
आलम यह है कि मुंबई-हावड़ा रूट पर चलने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। 11 मई को पुणे-प्रयागराज एक्सप्रेस में गोंडा (यूपी) के युवक की मौत हो गई। बुधवार सुबह मुंबई-वाराणसी श्रमिक स्पेशल में दो युवकों के शव मिले। काफी मशक्कत के बाद उनकी शिनाख्त हो पाई। इससे एक दिन पहले ही मंगलवार की देर रात महाराष्ट्र व गुजरात से बिहार जा रही दो ट्रेनों में दो लोगों की मौत हो गई।
बता दें कि जिन तीन ट्रेनों में चार लोगों की मौत हुई है वे सभी जबलपुर, सतना व मानिकपुर से गई थीं। सतना में सभी ट्रेनें ईंधन डलवाने के लिए 10-20 मिनट जरूर रुकती हैं। जीआरपी और आरपीएफ के मुताबिक ट्रेनों में किसी के बीमार होने की सूचना नहीं मिली।
इलाज न मिलने से तोड़ा दम
चलती ट्रेन व स्टेशनों पर दवा व इलाज न मिल पाने के कारण पुणे से प्रयागराज जा रही श्रमिक स्पेशल में 11 मई को गोंडा निवासी श्रमिक अखिलेश कुमार की मौत सतना में हो गई। इसी ट्रेन से 36 श्रमिक उतरे थे। लिहाजा गाड़ी 20 मिनट तक सतना में रुकी रही। बिना शव उतारे ही उसे स्टेशन से रवाना कर दिया गया। ट्रेन जब मझगांवा पहुंची तो तीन घंटे बाद मृतक के साथियों ने शव उतारा।
23 मई को भी एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन मानिकपुर के पास मुजफ्फरपुर निवासी महिला के नवजात शिशु की मौत हुई। महिला का प्रसव नरसिंगपुर के पास ट्रेन में हुआ था। जबलपुर में चिकित्सकों ने बच्चे को देखा था। लेकिन अस्पताल में दाखिल नहीं किया गया।
उधर जबलपुर मंडल से गुजरने वाली गाड़ियों में होने वाली मौत पर रेलवे का कहना है कि यात्री की तबीयत बिगड़ने की सूचना पर तुरंत नजदीक के स्टेशन को कंट्रोल रूम सूचित कर चिकित्सक दल भेजा जाता है। सीपीआरओ प्रियंका दीक्षित ने कहा कि ट्रेन में बीमार पड़ने वाले व प्रसव के मामलों में आगे की देखभाल के इंतजाम हैं। लेकिन कई मामलों में यात्री अपनी यात्रा स्थगित कर बीच में ही उतर जाते हैं। वहीं कुछ यात्री बीमारी की हालत में भी यात्रा करते रहते हैं।
Published on:
29 May 2020 04:42 pm
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