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66 दिन रहेगी आचार संहिता, आयोग के हवाले मध्यप्रदेश के कर्मचारी

28 नवंबर को होगा मतदान: शस्त्र लाइसेंस निलंबित, भूमिपूजन व लोकार्पण पर रहेगा प्रतिबंध

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66 days will remain the Code of Conduct in madhya pradesh

66 days will remain the Code of Conduct in madhya pradesh

सतना. निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव तिथियों की घोषणा करने के साथ ही आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई। इसके साथ ही सभी शासकीय अधिकारी कर्मचारी चुनाव आयोग के हवाले हो गए हैं। दोपहर बाद 3 बजे से आचार संहिता लागू होने के साथ ही विधानसभा क्षेत्रों में संपत्ति विरुपण की कार्यवाई शुरू कर दी गई। अब बिना अनुमति के कहीं भी राजनैतिक दलों, पार्टियों और प्रत्याशियों से जुड़े होर्डिंग, बैनर, पोस्टर, वॉल पेंटिंग नहीं की जा सकेगी।

इसके अलावा चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का पालन चुनाव खत्म होने तक हर राजनीतिक दल और उम्मीदवार को करना होगा। कोई उम्मीदवार इसका पालन नहीं करता है, तो आयोग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। उसे चुनाव लडऩे तक से रोका जा सकता है। आवश्यक होने पर उम्मीदवार पर एफआइआर भी दर्ज हो सकती है और दोषी पाए जाने पर जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

जिले के सभी शस्त्र लाइसेंस भी निलंबित माने जाएंगे। विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ शनिवार से आदर्श आचरण संहिता लागू हो गई है। मतगणना 11 दिसम्बर को होगी। इस प्रकार आचरण संहिता 66 दिन लागू रहेगी। 2013 में आचार संहिता 4 अक्टूबर को लागू हुई और मतगणना 8 के बाद दिसम्बर तक लागू रही। तब भी इसकी अवधि 66 दिवस रही।

सरकार और प्रशासन पर अंकुश
आचार संहिता लागू होते ही सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन गए हैं। ये सभी आयोग के अधीन उसके दिशा-निर्देश पर काम करेंगे। इस दौरान जनप्रतिनिधि न तो कोई घोषणा कर सकेंगे न शिलान्यास। इन पर लोकार्पण और भूमिपूजन का भी प्रतिबंध रहेगा। सरकारी खर्च पर ऐसा कोई भी आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी दल को लाभ पहुंचे।

धर्म के आधार पर अपील नहीं
कोई दल या प्रत्याशी किसी जाति, धर्म, समुदाय से संबंधित कोई अपील जारी नहीं कर सकेंगे। ये न तो ऐसी बात कहेंगे और न ही ऐसा काम करेंगे, जिससे जाति, धर्म और सामुदायिक मतभेद बढ़ें या तनाव पैदा हो। मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा या किसी भी धार्मिक स्थल का उपयोग किसी भी प्रकार से चुनाव प्रचार के लिए नहीं होगा।

'माननीय' के लिए अलग गाइडलाइन
- मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों का अब विश्राम गृहों, डाक बंगला या अन्य सरकारी आवासों में एकाधिकार नहीं रहेगा। इन्हें अब सामान्य नागरिक की ही तरह आवंटन होगा। पहले आओ पहले पाओ का सिद्धांत लागू होगा।
- मंत्रियों के शासकीय भ्रमण पर उसी स्थिति में गार्ड मिलेगा, जब वे सर्किट हाउस में ठहरें होंगे। इसके बाद गार्ड हटा ली जाएगी।
- शासकीय दौरा नहीं करेंगे। किसी परियोजनाओं और योजना की आधारशिला नहीं रखेंगे। अपने अधीन किसी भी निधि से कोई अनुदान स्वीकृत नहीं करेंगे।
- सड़क निर्माण सहित अन्य किसी योजनाओं और हितलाभ का कोई वचन नहीं देंगे, पीने के पानी की सुविधाएं नहीं देंगे। किसी भी रूप में कोई भी वित्तीय मंजूरी या वचन देने की घोषणा नहीं करेंगे।
- सार्वजनिक उपक्रम में कोई भी तदर्थ नियुक्ति नहीं होगी।
- मंत्री और जनप्रतिनिधियों के निजी आवास पर अधिकारी कर्मचारी बुलाने पर भी नहीं जाएंगे।

मतदाता को रिझाना पड़ेगा भारी
चुनाव के मद्देनजर मतदाता को पैसा, शराब, कपड़े देना अपराध माना जाएगा। मतदाताओं को धमकाना, डराना, पोलिंग स्टेशन तक ले जाना, मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में वोट देने का अनुरोध करना भी विधि के खिलाफ आचरण माना जाएगा। किसी के घर पर बगैर अनुमति के ध्वज दंड लगाना, झंडा टांगना, सूचना चिपकाना, बैनर लगाना, नारे लिखना अपराध होगा।

सड़क के दायीं ओर से निकलेगा जुलूस
अनुमति के बाद भी कोई जुलूस निकलता है तो उसे सड़क के दायीं ओर से निकालना होगा। जुलूस लंबा होने पर बीच में गैप देकर चलना होगा ताकि चौराहों पर यातायात सुचारू रह सके। सभा के लिए स्थान, समय के बारे में स्थानीय पुलिस और दण्डाधिकारी को समय पर सूचना देनी होगी और अनुमति लेनी होगी। जहां प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हो, वहां सभा नहीं की जा सकेगी। लाउडस्पीकर का उपयोग अनुमति के बाद ही कर सकेंगे। बिना सबूत के दलों या कार्यकर्ताओं की कोई आलोचना नहीं की जा सकेगी।