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बगहा के बाद अब मैहर के तालाब पर भी जमीन कारोबारियों ने शुरू करवाया काम

जिले में तालाबों के स्वरूप के साथ व्यापक पैमाने पर खेल शुरू शासकीय लेसी तालाब को निजी स्वामित्व में बदलकर किया गया खेल

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After Bagaha, now the work started by land traders on the Maihar pond

After Bagaha, now the work started by land traders on the Maihar pond

सतना. जिले में इन दिनों तालाबों को हड़पने का खेल व्यापक पैमाने पर शुरू हो गया है और जिम्मेदार अमला इस मामले में चुप्पी साधे बैठा है। अभी हाल राजस्व अमले की मौन सहमति के बीच बगहा तालाब के स्वरूप को परिवर्तित करने का मामला ठंडा नहीं हुआ है कि मैहर के एक प्रसिद्ध तालाब को खत्म करने की साजिश पर काम शुरू हो गया। यहां तालाब की जमीन पर फिलिंग कर प्लाटिंग की तैयारी जमीन कारोबारी ने शुरू कर दी है। हैरानी की बात यह है कि इस तालाब को बड़े शातिराना तरीके से अखाड़े और तालाब हो हटाते हुए निजी भू-स्वामित्व में लाया गया और अब पूर्व पटवारी इस पर प्लाटिंग का काम शुरू कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार मैहर स्थित बड़ा अखाड़े से लगी कई जमीनें है। जिसमें एक तालाब भी है। इस अखाड़े से लगी जमीन जिनकी आराजी 183, 184, 146, 1475, 1476, 192 और 193 स्थित है। इन सभी जमीनों को 24 जुलाई 1976 को तत्कालीन तहसीलदार मैहर ने कलेक्टर सतना को प्रबंधक के रूप में दर्ज कर दिया लेकिन साजिश पूर्वक आराजी नंबर 192 और 193 को छोड़ दिया गया। जबकि वर्ष 1958-59 की जमाबंदी में ये दोनों आराजी के तालाब के रूप में दर्ज है और कब्जेदार के रूप में श्री प्रमोदवन बिहारी शरण जू स्थान अखाड़ा मैहर के नाम दर्ज रहा। वर्ष 1967-68 के खसरों को देखें तो यह तालाब और पार के रूप में गौरमेन्टलेसी दर्ज है।

साजिशन हटाया अखाड़ा
1969 से 1988 के बीच खसरों में छेड़छाड़ कर बिना सक्षम आदेश के आराजी नंबर 192 व 193 में जू स्थान अखाड़ा शब्द हटाते हुए इसे श्री प्रमोदवन बिहारी शरण को भूस्वामी घोषित कर दिया गया और गौरमेंटलेसी शब्द हटा दिया गया। इसके बाद 31 मार्च 1989 को तत्कालीन पटवारी और तहसीलदार ने इन दोनों आराजियों का वारसाना नामांतरण श्री प्रमोद वन बिहारी शरण से हटाते हुए सिर्फ संतशरण जी महाराज बड़ा अखाड़ा कर दिया गया। बड़े खेल के तहत यहां पर अखाड़े के नाम की संपत्ति को व्यक्ति के नाम पर कर दिया गया।

जैसे अखाडा हटा शुरू हुआ बड़ा खेल
जैसे ही इस जमीन से अखाड़ा और गौरमेंटलेसी हटाकर महाराज के नाम पर जमीन की गई उसके बाद इस जमीन पर बंदरबांट का खेल शुरू हो गया। 1990 से 1993 के बीच यहां 30 से ज्यादा नामांतरण हो गए। जिसमें तत्कालीन हल्का पटवारी व उनके रिश्तेदार भी शामिल हैं।

अब तालाब का बदल रहे स्वरूप
बताया गया है कि अब जमीन कारोबारी इस तालाब के अंदर मिट्टी डलवाकर तालाब को भाठने का खेल शुरू हो गया है और यहां जमीनों की प्लाटिंग का भी काम शुरू हो गया है। इसमें तत्कालीन सेवा निवृत्त पटवारी की भूमिका भी बताई जा रही है। स्थानीय जनों ने अखाड़े से जुड़ी गौरमेंट लेसी इस जमीन को खुर्दबुर्द कर तालाब खत्म करने के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और इस संबंध में जिम्मेदारों को ज्ञापन भी सौंपा है।

'' यह मामला संज्ञान में लेते हुए संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया जाएगा। तालाब का स्वरूप नहीं बदला जा सकता है '' - एचके धुर्वे, एसडीएम मैहर