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सतना में बनेगा एशिया का पहला सीमेन्ट म्यूजियम, विश्व का छठवां म्यूजियम होगा

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सीएसआर मद से होगा निर्माण  

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Asia's first cement museum to be built in Satna

Asia's first cement museum to be built in Satna

सतना. देश की सीमेन्ट कैपिटल के रूप में पहचाने जाने वाले सतना जिले को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत एक बड़ी सौगात मिलने वाली है। भारत में उत्पादित होने वाली कुल सीमेन्ट का 10 फीसदी सीमेंट उत्पादित करने वाले सतना जिले में सीमेन्ट म्यूजियम बनाया जाएगा। यह म्यूजियम एशिया का पहला म्यूजियम होगा और विश्व में छठवां। इसकी अनुमानित लागत 30 करोड़ बताई गई है। इस विषय को लेकर नगर निगम में प्रिज्म, बिरला, केजेएस सहित अन्य सीमेन्ट कंपनियों के प्रबंधन के साथ बैठक की गई और सीएसआर मद से इस म्यूजियम के निर्माण पर चर्चा की गई। जिस पर सभी सीमेंट प्रबंधन ने अपनी सहमति जताई है। इस प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने के लिये शीघ्र की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी।
स्मार्ट सिटी की कंसल्टेंट एजेंसी टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स की टीम ने इस संबंध में बुधवार को निगम कार्यालय के सभागार में सीमेंट कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। टीम लीडर दीपांकर दत्ता ने सीमेंट प्रबंधन को बताया कि सतना सीमेंट का हब है। सतना शहर में जो भी अभी आते हैं तो उन्हें इस बात का मलाल रहता है कि यहां ऐसी कोई जगह नहीं है जिसे पर्यटक स्थल के रूप में देखा जा सके। ऐसे में देश में सीमेंट राजधानी के रूप में पहचाने जाने वाले सतना को सीमेंट कंपनियों के सीएसआर मद से एक सीमेंट म्यूजियम एंड स्किल डेवलपमेंट सेंटर दिया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर सभी सीमेंट कंपनियों के प्रतिनिधियों ने सहमति देते हुए मदद का आश्वासन दिया।

टूरिस्ट मैप में होगा शामिल
दीपांकर ने बैठक में बताया कि सीमेंट म्यूजियम सतना को विश्व के टूरिस्ट मैप में स्थान दिलाएगा। विश्व में अभी ऐसे पांच म्यूजियम यूएसए, स्पेन, नार्वे, यूक्रेन और रसिया में हैं। इसके बाद सतना छठवा म्यूजियम होगा जो एशिया का पहला होगा। इसी खासियत पर बताया गया कि यह सतना का एक टूरिस्ट मैगनेट होगा जिसे देखने देशी विदेशी 15000 पर्यटक सालाना पहुंचेंगे। यह संख्या क्रमश: बढ़ती जाएगी। इसके साथ ही यहां कारीगरों और शिल्पकारों को रोजगार परक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जिसमें वे निर्माण की विभिन्न कलाओं को सीखेंगे। इसके साथ ही उद्यमिता और कौशल को पहचान देने के लिये स्थानीय लोगों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों को म्यूजियम में स्थान दिया जाएगा।