
Babulal Dahiya
सतना. प्रयोगात्मक खेती और खेती को लोकजीवन से जोडऩे के लिए काम करने वाले सतना जिले के बाबूलाल दाहिया को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। पत्रिका ने जब उन्हें फोन पर उनकी प्रतिक्रिया चाही तो उनका कहना था कि मैं अवार्ड के लिए काम नहीं करता। फिर भी सरकार ने दिया है तो उनका बड़प्पन है।
सतना जिले के पिथौराबाद गांव में रहने वाले किसान बाबूलाल दाहिया सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय हैं। वे बघेली के जाने माने कवि भी हैं और 75 साल की उम्र में कृषि में नित नए प्रयोग करते रहते हैं। उनके पास 8 एकड़ जमीन है जिसमें वह जैविक खेती करते हैं। दाहिया डाक विभाग में पोस्ट मास्टर के पद से रिटायर हुए हैं। वे लोकगीत व लोक संस्कृति के साथ लोक अन्न भी सहेजकर रखते हैं। उनके पास अब देशी धान की 110 किस्मों का खजाना है, वे हर साल इन्हें अपने ही खेत में बोते हैं और उनका अध्ययन करते हैं। 2015 में सिर्फ 400 मिमी बारिश हुई और सूखे से फसलें बर्बाद हो गई पर दाहिया के खेत में लगी 30 किस्मों पर सूखे का कोई असर नहीं हुआ। उनकी पैदावार हर साल की तरह ही रही, इससे आसपास के किसान उनके लोकविज्ञान से खासे प्रभावित हुए। अब 30 गांवों के किसान उनके साथ मिलकर धान और मोटे अनाज (कोदो, कुटकी, ज्वार) की खेती कर रहे हैं।
वे कहते हैं कि एक रात उन्हें फोन के माध्यम से जानकारी लगी कि सरकार उनका सम्मान करना चाहती है। उन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा, मित्रों कल मुझे माननीय उप संचालक महोदय कृषि सतना की ओर से रात 2 बजे जगाकर सूचित किया गया कि आप और एक अन्य किसान को जैविक कृषक के रूप में कृषि विभाग की ओर से 10 सितंबर को सम्मानित किया जाएगा। सुबह ठंडे दिमाग से सोचने पर मुझे ऐसा लगा कि मध्यप्रदेश सरकार का किसी भी तरह का पुरस्कार लेना उन किसानों को अपमानित करने और धोखा देने जैसा है, जो किसानों के लिए आंदोलन कर रहे है अथवा किसान हित में शहीद हो चुके है। इस लिए माननीय उप संचालक महोदय से क्षमा चाहते हुए धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।
Published on:
25 Jan 2019 11:33 pm

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