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रमाशंकर शर्मा @ सतना। प्रदेश में सहकारिता महाघोटाले की आंच अभी थमी नहीं थी कि अब भावान्तर योजना में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। चुनिंदा व्यापारियों द्वारा एक ही कृषक से बड़ी मात्रा में प्रचलित बाजार मूल्य से कम दर पर उपज खरीदी कर बड़े खेल को अंजाम दिया गया है।
मामले में राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने फर्जीवाड़े की आशंका के मद्देनजर प्रदेशभर के 647 संदिग्ध संव्यवहारों की जांच के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर से 24 फरवरी तक रिपोर्ट तलब की गई है।
इसमें सतना जिले के भी कई नामी व्यापारियों के नाम शामिल हैं। अब मामला सामने आने के बाद मंडी अधिकारियों के हाथ पांव फूलने लगे हैं।
चौंकाने वाले तथ्य सामने आए
खरीफ 2017 के लिए भावांतर भुगतान योजना में चयनित उपज की किसानों से व्यापारियों द्वारा की गई खरीदी में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। स्थिति यह है कि कुछ चुनिंदा व्यापारियों द्वारा भावांतर योजना के तहत एक ही कृषक से व्यापक पैमाने पर प्रचलित बाजार मूल्य से कम दर पर उपज खरीदी है।
बाजार मूल्य से कम दर
शंका तब हुई जब एक ही व्यापारी द्वारा एक ही किसान से अनेक बार प्रचलित बाजार मूल्य से कम दर पर खरीदी की गई। शंका के आधार पर जब इसकी पड़ताल की गई तो पाया गया कि मामला इससे कहीं और आगे है। व्यापारियों ने योजना के तहत किसानों की उपज समर्थन मूल्य की तुलना में काफी कम दर पर खरीदी की है।
विंध्य के कई व्यापारी निशाने में
संदिग्ध खरीदी को लेकर विंध्य के कई व्यापारी जांच की जद में आ गए हैं। सतना जिले के गोविंद बड़ेरिया, रवि नागदेव, निलय कुमार डागा, रीवा के गोपाल जी गुप्ता शामिल है। पन्ना जिले में राकेश कुमार असाटी पन्ना, अनिल अग्रवाल पन्ना, सुदामा जायसवाल देवेन्द्रनगर, प्रकाश अग्रवाल सिमरिया शामिल हैं। इसके अलावा जिन जिलों में संदिग्ध संव्यवहार हुआ है।
MP के कई व्यापारी जांच की जद
उनमें आगर मालवा, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, भोपाल, बुरहानपुर, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, दतिया, देवास, धार, गुना, हरदा, होशंगाबाद, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, झाबुआ, विदिशा, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सागर, सीहोर, सिवनी शाजापुर, शिवपुरी, अशोकनगर, हरदा आदि के व्यापारी शामिल हैं।
तीन तरह के संदिग्ध मामले पकड़ में आए
भावांतर योजना में जो फर्जीवाड़े की आशंका सामने आई है उसमें तीन तरह के मामले पकड़ में आए हैं। पहला मामला एक ही ट्रेडर्स द्वारा एक ही किसान से काफी कम दरों पर खरीदी (४०६ मामले), दूसरा मामला ट्रेडर्स द्वारा काफी कम कीमत पर व्यापक पैमाने में उपज की खरीदी (१७६ मामले) और तीसरा मामला काफी कम दरों पर व्यापक पैमाने पर किसान द्वारा उपज की बिक्री (६५ मामले) है।
कलेक्टर को दिए जांच के निर्देश
भावांतर में इस तरीके से संदिग्ध संव्यवहार की जानकारी सामने आने पर राज्य कृषि विपणन बोर्ड में हड़कम्प मच गया है। आनन-फानन बोर्ड के प्रबंध संचालक सह आयुक्त फैज अहमद किदवई ने इसकी विस्तृत जांच का निर्णय लेते हुए कलेक्टरों को समय सीमा में जांच पूरी कर प्रतिवेदन तलब किया है। कहा गया है कि 16 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक की गई खरीदी की बिंदुवार जांच कर 24 फरवरी तक जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। यह जांच जिला स्तरीय दल से कराने कहा गया है।
समर्थन मूल्य से 60 फीसदी कम कीमत पर खरीदी
योजना में चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि ज्यादातर संदिग्ध खरीदी समर्थन मूल्य से 60 फीसदी कम दर पर हुई है। जानकारों का कहना है कि कोई भी किसान इतनी कम कीमत पर इतने व्यापक पैमाने पर अपनी फसल नहीं बेचेगा। माना जा रहा है कि सरकार से योजना के तहत अतिरिक्त लाभ के लिए यह खेल व्यापारियों ने ही खेला है।
जांच के बिंदु
- किसान का पोर्टल पर पंजीकृत कराया गया कुल रकबा एवं बोनी का क्षेत्रफल का राजस्व विभाग की गिरदावरी से मिलान।
- किसान के समस्त विक्रय संव्यवहारों के मंडी रिकार्ड का परीक्षण।
- वर्ष 2017-18 तथा 2018-19 दोनों वर्षों में राजस्व रिकार्ड अनुसार संबंधित कृषक द्वारा उत्पादित फसल एव उसकी मात्रा का परीक्षण।
- खरीदी में नकद एवं डिजिटल पेमेंट किसान के जिस बैंक खाते में जमा किया गया है उसी बैंक खाते में भावांतर के भुगतान की स्थिति का परीक्षण। इसमें यह भी देखा जाएगा कि संव्यवहार और वास्तविक भुगतान की दिनांक में कितना अंतर है।
- संबंधित व्यापारी द्वारा भावांतर भुगतान योजना में अन्य किसानों से खरीदी गई कुल मात्रा एवं एक किसान से समर्थन मूल्य की अपेक्षा 60 फीसदी से कम दर पर खरीदी गई मात्रा का अनुपात।
- मंडी प्रांगण में घोष नीलामी में एक किसान से प्रचलित बाजार मूल्य से कम दर पर वृहद मात्रा में खरीदी तथा उस दिन अन्य व्यापारियों द्वारा घोष नीलामी में खरीदी गई मात्रा का अनुपात।
Published on:
22 Feb 2018 02:22 pm
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