
Birsinghpur road accident: six children and bus driver was killed
रोहित पाठक@सतना। कक्षा 9वीं में पढऩे वाले प्रियांश की मां रेखा यादव का रो-रोकर बुरा हाल है। वह विलाप करते हुए कहती है, जिस बेटे को सुबह बड़े ही लाड़-प्यार से तैयार कर स्कूल भेजा था, महज दो घंटे बाद हादसे में उसकी मौत की खबर आ गई। खबर सुनते ही रेखा की आंखों से आंसू झलक उठे। रोते-रोते सोच रही थी कि काश...! खबर झूठी हो, हादसा ही न हुआ हो पर शाम को सरकारी पॉलीथिन में लिपटकर बेटे का शव घर पहुंच गया।
मां से लिपटी हुई बहनें साक्षी व निधि खड़ी हैं, जिनका प्रियांश इकलौता भाई था। यह केवल प्रियांश के घर की तस्वीर नहीं, बल्कि दो गांव देवरा व पगारकला के 6 परिवारों की तस्वीर है। इन गांवों में मातम फैला हुआ है। किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। गुरुवार की सुबह स्कूली जीप और बस की भिड़ंत में छह बच्चों समेत सात लोगों की मौत की खबर जैसे ही पहुंची, गांव चीत्कार से गूंज उठा।
घटना की जिसे भी जानकारी हुई वह बदहवास होकर मौके की ओर दौड़ पड़ा। बच्चों के परिजन घटनास्थल व अस्पताल पहुंचे। वहां जानकारी जुटाने में लगे रहे कि आखिर हुआ क्या? दुर्भाग्य यह रहा कि चंद अभिभावकों को छोड़ दिया जाए तो शेष के भाग्य में बच्चे की मौत की खबर ही आई। इसके बाद आंखों के सामने अंधेरा छा गया और सिस्टम को कोसने के अलावा कुछ नहीं बचा था।
खुशबू के लिए गांव मांग रहा दुआ
हादसे में शिल्पी, सचिन, अभय के साथ बैठी खुशबू भी गंभीर रूप से घायल हुई है। उसे सतना के लिए रेफर कर दिया गया। इसी बीच अफवाह फैली कि उसकी भी मौत हो गई है। हालांकि कुछ देर बाद पुष्टि हुई कि उसका इलाज जारी है। अब उसकी कुशलक्षेम के लिए पूरा गांव मन्नत मांग रहा है। सभी दुआ कर रहे कि बेटी जल्द ठीक हो जाए।
चरपाई पर बेटी का शव
शिल्पी कुशवाहा के घर का नजारा भी गमगीन है। शिल्पी सुबह बड़े ही नाज-नखरे के साथ तैयार होकर स्कूल गई थी। शाम को उसका शव आया तो घर के बाहर ही चरपाई पर रखवा दिया गया। परिजनों की हालत खराब है। मां दरवाजे के पास बिलख-बिलख कर रोते हुए बेटी को याद करती रही। घर के पुरुषों की आंखों में भी आंसू हैं पर वे बोलने की स्थिति में नहीं हैं।
20 मिनट में आई हादसे की सूचना
कमलेश पटेल घर के काम में व्यस्त थे। सुबह के करीब 9.20 बज रहे थे। उनके सामने ही भतीजा प्रियांश तैयार होकर स्कूल के लिए निकाला था। करीब 20 मिनट बाद वाहन के हादसे की खबर आ गई। वे परिवारवालों को बिना कुछ बताए घटनास्थल दौड़ते हुए पहुंचे।
ये हैं घायल
नितिन कुशवाहा निवासी पगार कला (7), अमित पाण्डेय निवासी पगार कला (15), मुस्कान द्विवेदी निवासी देवरा (7), खुशबू द्विवेदी (12) निवासी पगार कला, गेंदिया बाई (65) निवासी पिण्ड्रा, शेषमणि (38) निवासी कपसा रीवा, शांति (45) निवासी सेमरिया रीवा, अंजली शुक्ला निवासी ग्राम उजेनी (19), हरिशंकर कुशवाहा (40) घायल हुए हैं। इन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जबकि दो घायल बिड़ला अस्पताल और दो को रीवा रेफर किया गया है। संजय गांधी अस्पताल के सर्जरी आइसीयू में भर्ती दोनों बच्चों को गुरुवार शाम कमिश्नर महेशचन्द्र चौधरी देखने पहुंचे। परिजनों को अच्छे इलाज का भरोसा दिलाया। कहा कि अस्पताल में नि:शुल्क इलाज कराया जाएगा।
पांच का अंतिम संस्कार हुआ
घटना के बाद गांव के बुजुर्गों का मत था कि अंतिम संस्कार जल्द हो जाए ताकि माहौल सामान्य हो। परिजन भी राजी हुए। उसके बाद अंतिम संस्कार शुरू हुआ। चालक रज्जन कुशवाहा व शिल्पी कुशवाहा का अंतिम संस्कार गांव के बाहर श्मशान में हुआ। पूर्वी, महक व अभय के शव को लेकर परिजन इलाहाबाद के लिए रवाना हो गए। सचिन व प्रियांश का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। कारण था कि परिजन अभी बाहर हैं।
अधिकतर बच्चों के पिता मजदूर
खास बात यह है कि मृत बच्चों के परिवार निम्न-मध्यवर्गीय हैं। उनके पिता मजदूरी व खेती-किसानी के भरोसे परिवार चला रहे हैं। सचिन के पिता राजस्थान में मजदूरी करते हैं, तो प्रियांश के पिता मलेशिया में मजदूरी करते हैं। जिस परिवार के तीन बच्चे मरे हैं, वह खेती पर निर्भर है।
चश्मदीद भी दहशत में
बस में सवार रहे राजनारायण मिश्रा ने बताया, वे सेमरिया से जैतवारा जा रहे थे। बस काफी रफ्तार में थी। उसी रफ्तार में सामने से जीप आई और जोरदार टक्कर हुई। चीख पुकार मचते ही बस से उतरे और बचाव कार्य में जुट गए। झलवार से पगार जा रहे रवि साकेत का कहना है कि उसे समझ ही नहीं आया कि क्या हो गया? शोर सुना तो बस से बाहर निकलने की कोशिश की। रवि को भी मामूली चोट आई है। शाहपुर से चित्रकूट जा रहीं प्रियंका शुक्ला ने बताया कि वह अपनी बेटी को गोद में लिए सो रही थीं। टक्कर लगते ही नींद खुली और वह घबरा गईं।
Published on:
23 Nov 2018 02:17 pm

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