
Books from private publishers
सतना. सरकार एक ओर शिक्षा की गारंटी अधिनियम लागू कर अभिभावकों को लालीपाप दे रही है। वहीं दूसरी ओर निजी विद्यालयों को निजी प्रकाशकों की किताबे चलाने की छूट देकर अभिभावकों को लूटने पर मजबूर कर रही है। जी हां शहर के 90 फीसदी सीबीएसई बोर्ड एवं कान्वेंट स्कूल संचालक मनमानी पूवर्क निजी प्रकाशकों की बुक चलाकर अभिभावकों को खुलेआम लूट रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि प्रशासन निजी विद्यालयों में सरकारी पुस्तके चलाना अनिवार्य कर दे तो संकट की इस घड़ी में अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
5 से 10 गुना महंगी
शहर के निजी विद्यालय निजी प्रकाशकों की पुस्तक चलाकर छात्रों से सालभर में मिलने वाली फीस से अधिक कमीशन किताबों से एक माह में कमा लेते हैं। पुस्तक विक्रेताओं का दावा है कि निजी प्रकाशकों की किताबों का मूल्य सरकारी किताबों से ५ से दस गुना तक अधिक होता है। वहीं हर स्कूल की दुकान फिक्स होने के कारण दुकानदार प्रिंट रेट पर अभिभावकों को कितावे बेच कर जमकर मुनाफा काटते हैं। किताब विक्री से होने वाले मुनाफे में 30से 50 फीसदी कमीशन स्कूल संचालकों को मिलता है। इस पर रोक से अभिभावकों को प्रति छात्र ४ हजार रूपए तक की राहत मिल सकती हैं।
होमवर्क के बहाने बना रहे दबाव
दो माह से स्कूल बंद होने से फीस वसूली करने में असमर्थ निजी स्कूल संचालक आनलाइन पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों पर किताबे खरीदने का दबाव बना रहे हैं। एक अभिभावक ने बताया की आनलाइन पढ़ाई के नाम पर किताब के एक पेंज की फोटों खीच कर डाल दी जाती है और दूसरे दिन उसका होमवर्क पूरा कर दिखाने को कहा जाता है। बिना किताब होमवर्क नहीं हो सकता। इसलिए बच्चों किताब खरीदने अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं।
Published on:
16 May 2020 12:40 am
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