
सतना. नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (एनसीआरपी) के अनुसार मध्यप्रदेश में लगातार कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके आखिरी रिलीज डेटा के अनुसार 2020 में कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ कर 77888 हो गई थी। जो विगत दो वर्षों 2018 में 73957 और 2019 में 75911 थी। इसमें भी देखें तो सबसे ज्यादा मरीज विन्ध्य क्षेत्र से निकल रहे हैं। आज की स्थिति में मध्यप्रदेश में कैंसर इलाज की शासकीय सुविधा सिर्फ जबलपुर और ग्वालियर में है। एम्स में अलग से कैंसर यूनिट है। इस स्थिति को देखते हुए जब मध्यप्रदेश का पहला शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना में खोला गया था तो यह तय किया गया था कि सतना मेडिकल कॉलेज में पृथक से कैंसर यूनिट बनाई जाएगी। इसी के आधार पर मेडिकल कॉलेज की ड्राइंग डिजाइन में इसकी व्यवस्था भी थी। साथ ही यह तय किया गया था कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर सतना मेडिकल कॉलेज को कैंसर की सुपर स्पेशलिटी दी जाएगी। क्योंकि रीवा में अभी तक न्यूरों, हार्ट और किडनी की सुपर स्पेशलिटी है। लेकिन आज की स्थिति यह है कि सतना मेडिकल कॉलेज के लिए कोई प्रस्ताव कैंसर सुपर स्पेशलिटी के लिए नहीं भेजा गया है। जबकि हाल ही में रीवा में कैंसर यूनिट की स्थापना की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इस आधार पर यह तो तय हो गया है कि मेडिकल कॉलेज का हॉस्पिटल बनता भी है तो यहां कैंसर का इलाज नहीं होगा।
यह थी रीवा की सुपर स्पेशलिटी
जब चिकित्सा शिक्षा विभाग स्वतंत्र विभाग था उस वक्त मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर यह व्यवस्था तय की गई थी कि सभी मेडिकल कॉलेजों में सभी सुपर स्पेशलिटी व्यवस्था न दी जाकर इसका विकेन्द्रीकरण किया जाए। इसके तहत अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया। इसके तहत हमीदिया को नेत्र रोग का एक्सीलेंस सेंटर बनाया गया। फिर सुपर स्पेशलिटी का कान्सेप्ट दिया गया जिसमें तय किया गया कि अलग-अलग मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी सेंटर खोल कर यहां विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। इसके तहत रीवा में न्यूरो, हार्ट और किडनी की सुपर स्पेशलिटी सुविधा दी गई।
सतना को कैंसर सुपर स्पेशलिटी का था प्लान
जब सतना मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हुआ उस वक्त सतना मेडिकल कॉलेज को कैंसर विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा का केन्द्र बनाने का प्लान तय किया गया। इसके अनुसार ड्राइंग में प्रावधान भी रखा गया। लेकिन अब संचालनालय से मिली जानकारी के अनुसार यहां अभी तक कैंसर यूनिट का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। यह भी बताया गया कि जब तक हॉस्पिटल प्रारंभ नहीं हो जाता है तब तक इस यूनिट की स्वीकृति भी नहीं हो सकती है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट में जो डिपार्टमेंट की सूची है उसमें भी कैंसर यूनिट का कोई उल्लेख नहीं है। इस आधार पर स्पष्ट है कि जब मेडिकल कॉलेज का हॉस्पिटल बन जाएगा तो भी यहां कैंसर का इलाज नहीं हो सकेगा क्योंकि यहां पर न तो यहां मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट की पदस्थापना है और न ही ऑन्को सर्जन की।
'' यह विषय राज्य शासन स्तर के हैं। उस पर हम कुछ नहीं कह सकते हैं। अभी यहां कैंसर यूनिट जैसी कोई जानकारी नहीं है। '' - डॉ एसपी गर्ग, डीन मेडिकल कॉलेज
Updated on:
20 Apr 2024 10:56 am
Published on:
08 Apr 2024 09:56 am
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