
Case of newborn missing: Satna District hospital clean chit
सतना। जिला अस्पताल में दुष्कर्म पीडि़ता नाबालिग के प्रसव उपरांत जन्मे नवजात के लापता होने के मामले में बड़ा टर्न सामने आ गया है। मामले की जांच रिपोर्ट के बाद कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी है। अज्ञात दंपती को सौंपे गए नवजात की रिकवरी के लिए कलेक्टर पूरा मामला पुलिस को सौंपेंगे। उल्लेखनीय है कि पत्रिका की पड़ताल में यही तथ्य सामने आए थे। पत्रिका ने भी इस पूरे मामले में सबसे पहले नवजात की रिकवरी में बरती जा रही लापरवाही का मुद्दा उठाया था।
अब मामले में जिला अस्पताल की पुलिस चौकी सहित चाइल्ड लाइन के समन्वयक और कर्मचारी सवालों के घेरे में आ गए हैं। उधर बाल कल्याण समिति भी इसमें चाइल्ड लाइन को गंभीरता नहीं दिखाने की बात स्वीकारी है। माना है कि मामले में प्राथमिक जिम्मेदारी बच्चे की रिकवरी कराना था, जिसके लिए प्राथमिक सूचना चाइल्ड लाइन को देना था और कलेक्टर को पूरे घटना क्रम से अवगत कराना था।
पुलिस करेगी जांच
कलेक्टर मुकेश शुक्ला ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने पूरी जांच करने के बाद बताया है कि उनके यहां से कोई बच्चा गायब नहीं हुआ है। न ही उनके संबंधित बच्चे को किसी को गोद दिया गया है। जच्चा बच्चा नियमत: डिस्चार्ज किए गए हैं। कलेक्टर ने माना कि इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका सही है और वे सही काम कर रहे। उन्होंने यह भी माना कि प्राथमिकता बच्चे की वापसी है। इस संबंध में वे पुलिस को पूरा मामला सौंपेंगे और मामले के दोषियों का पता लगाने का काम भी पुलिस करेगी।
यह है मामला
जिला अस्पताल में दुष्कर्म पीडि़ता नाबालिग को प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती कराया गया था। प्रसव उपरांत नवजात की हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। वहां इलाज उपरांत उसकी तबीयत ठीक होने पर पुलिस को सूचना देने के बाद जच्चा-बच्चा को डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके बाद से एक नाटकीय घटनाक्रम सामने आया। चाइल्ड लाइन समन्वयक द्वारा बाल कल्याण समिति को लिखे गए पत्र के बाद सनसनी मचा गई। पत्र के अनुसार चाइल्ड लाइन समन्वयक दीपक गौतम संबंधित नवजात को अस्पताल चौकी प्रभारी की जानकारी में किसी अज्ञात दंपती को बच्चा गोद दिए जाने का उल्लेख करते हुए अपनी ही कर्मचारी सीमा सेन पर सवाल खड़े करते हैं। इसके साथ ही संबंधितों को दोषी बताते हुए कार्रवाई की बात कहते हैं।
यह है नियम
इधर बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष द्वारा भी अब माना गया कि चाइल्ड लाइन समन्वयक ने पूरे मामले में तय प्रोटोकाल का पालन नहीं किया गया। इनके अनुसार जब समन्वयक को नवजात के जन्म लेने की सूचना मिली और इसमें कुछ संदिग्ध स्थिति दिखी तो सबसे पहले उन्हें स्वयं अस्पताल जाकर नवजात के संबंध में जानकारी लेनी थी। संबंधित नवजात की मां से बात करते। अगर नवजात इस स्थिति में नहीं मिलता तो उन्हें सबसे पहले उस बच्चे की रिकवरी के लिए पुलिस में रिपोर्ट करानी थी और कलेक्टर को सूचित करना था। अध्यक्ष ने कहा, सीडब्लूसी तो चाइल्ड लाइन के पास बच्चे की मौजूदगी होने पर उसे कहां भेजना है इसका निर्णय करती है। फिर भी जिस तरीके से पत्र दिया गया तो इस मामले में सिविल सर्जन से महज बच्चे की जन्म और उसकी अस्पताल से डिस्चार्ज के संबंध में जानकारी लेने सामान्य पत्राचार किया गया।
एसपी भी कराएंगे जांच
इस पूरे घटनाक्रम में जिस तरीके पुलिस चौकी के प्रभारी व कर्मचारी की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह गौर ने जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
13 Aug 2018 12:55 pm
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