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chhath puja 2017: नहाय-खाय की परम्परा के साथ शुरू होगा डाला छठ महापर्व, इस तरह हो रही तैयारियां

छठ पूजा आज से: महापौर ने संतोषी माता तालाब की साफ-सफाई का लिया जायजा

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chhath puja 2017 shubh muhurat for worship time of first arghya

chhath puja 2017 shubh muhurat for worship time of first arghya

सतना। नहाय-खाय की परंपरा के साथ बुधवार को छठ महापर्व प्रारंभ होने जा रहा है। छठ महापर्व को लेकर व्रतधारियों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। रवियोग में शुरू हो रही छठपूजा का महापर्व शहर के अलावा जिले के अन्य हिस्सों में धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।

कार्तिक मास के शुक्लपक्ष चतुर्दशी से सप्तमी तक चलने वाला चार दिवसीय ये पर्व लोगों के लिए विशेष मान्यता रखता है। इस पूजा के दौरान 36 घंटे तक निर्जला व्रत किया जाता है। मंगलवार को महापौर ममता पाण्डेय ने संतोषी माता तालाब का मौका मुआयना किया। वहां साफ सफाई व्यवस्था देखी और सफाई कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए।

दिनभर साफ-सफाई

मंगलवार को दिनभर घर की साफ-सफाई की गई। स्वच्छता के बाद शुद्ध शाकाहारी भोजन तैयार किया गया। इस दौरान व्रतधारियों के लिए कद्दू और चावल से प्रसाद बनाया गया, जिसका सेवन व्रतधारी करेंगे। इधर, सुलभ कॉम्प्लेक्स का पानी जा रहा संतोषी माता तालाब में डाला छह संतोषी माता तालाब में मनाया जाएगा।

इस बात को लेकर कई लोगों में गुस्सा

समिति के सचिव प्रभुदयाल शर्मा का कहना है कि मंदिर के पास स्थित सुलभ काम्प्लेक्स का गंदा पानी संतोषी माता तालाब में विगत कई माह से जा रहा है। इस बात को लेकर कई लोगों में गुस्सा है। जबकि इसी तालाब में आधा डूबकर छठ व्रतधारी भगवान सूर्य देवता को अघ्र्य देते हैं।

खरना आज
इस दिन व्रतधारियों का ३६ घंटे का निर्जला उपवास शुरू होता है। रोटी गुड़ से बनी खीर का प्रसाद बनाकर इसदिन से ही भगवान भास्कर की आराधना की जाती है।

26 को संध्या अघ्र्य
तीसरे दिन सूर्य षष्ठी को निर्जला उपवास रखकर शाम के समय डूबते सूर्य को अघ्र्य समर्पित किया जाएगा और रात में छठ माता की कथा सुनी जाएगी।

36 घंटे का निर्जला व्रत
छठ पूजा का व्रत महिला-पुरुष समान रूप से करते हैं। इसकी शुरुआत कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक चलता है। 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखकर उगते सूर्य को अघ्र्य देने के साथ इस महापर्व का समापन होता है।

27 को सुबह अघ्र्य व समापन
चौथे दिन शुक्रवार को सुबह के समय भगवान भास्कर के दर्शनों के साथ ही पानी में खड़े होकर अर्घ समर्पित किया जाएगा। इसके लिए व्रतधारी सूर्य निकलने से पहले शरीर के आधे हिस्से तक पानी में रहकर भगवान की आराधना करते हैं।