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सतना। राजनीति की स्थिति किसी व्यक्ति से छुपी नहीं है। हकीकत यह है कि लगातार गिरावट देखने को मिल रहा है। कारण है कि अच्छे लोग दूरी बनाए हैं, जबकि समर्पित रूप से समाज के बीच काम करने वाले लोगों को जनता पंसद करती है। सवाल यह है, यह लोग सदन में कैसे जाएं? एेसे लोग दलगत राजनीति से दूर रहते हैं। बुराई के दल-दल में फंसना नहीं चाहते। इनको प्रेरित करने व बदलाव के लिए इनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनाने के लिए पत्रिका ने जो अभियान शुरू किया है, वह वर्तमान राजनीति को नई दिशा देगा। यह बातें शनिवार को पत्रिका महाअभियान 'स्वच्छ करें राजनीति परÓ आयोजित टॉक शो में शहर के प्रबुद्धजन, सामाजिक, धार्मिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने व्यक्त किया।
ये मुद्दे रहे खास
- राजनीति में स्वच्छ छवि के लोगों का आना होगा।
- आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को नकारना होगा।
- जातिवाद के आधार पर वोट न हों।
- अच्छे लोगों की मदद करनी चाहिए।
- सदचरित्र व्यक्ति का होना जरूरी।
- राष्ट्रहित महत्वपूर्ण हो।
- सामाजिक संगठन महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।
- शिक्षा जरूरी हो।
- प्रतिभा व कौशल का सम्मान होना चाहिए।
- राजनीति आम व्यक्तिको ध्यान रख कर हो।
जिम्मेदारी नहीं निभाते
अभी के विधायकों और पार्षदों में अनेक खामियां हैं। वे अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पा रहे। क्षेत्र और वार्ड की समस्याओं को ठीक ढंग से उठा नहीं पाते हैं। चेंजमेकर वही होगा जो अपनी झोली भरने से पहले समाज की इच्छाओं को प्राथमिकता देगा।
धर्मेंद्र गोयल, वैश्य सामाज।
उचित कदम उठाना जरूरी
आज राजनीति में अच्छाई के नाम पर शायद कुछ नहीं बचा। सामाजिक हस्तियों को चुनाव के माध्यम से नेतृत्व सौंपने के लिए प्रेरित करने की जो कवायद हुई है, वह एक अखबार की सार्थकता को दर्शाते हैं।
अनिता जैन, जिला प्रभारी, पतंजलि।
शिक्षित नेतृत्व समाज बदल सकता है
राजनीति में शिक्षित नेतृत्व की जरूरत है। इसकी महती आवश्यकता है। वर्तमान राजनीति में इसकी चर्चा नहीं होती। जब समाज जागेगा, राजनीतिक परिवेश खुदबदल जाएगा।
आशीष अग्रवाल, अध्यक्ष, गौ-सेवा मेडिकल संस्थान।
सक्रियता बहुत जरूरी
जनता विकल्प तो चाहती है। साफ-सुथरे व्यक्तित्व उभरने का प्रयास भी करते हैं, पर जनता साथ नहीं देती। समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक आंदोलन किया, जनता का साथ मिला तो वह सफल रहा। लेकिन, फिर हालत वहीं हो गए।
मनीष कुमार मित्तल, विंध्य चेंबर ऑफ कामर्स।
अच्छे नेतृत्व की जरूरत
अन्ना का आंदोलन जनता की आवाज बना। जिसके बाद दिल्ली की राजनीति में परिवर्तन हुआ। चेंज मेकर की पहल दलगत राजनीति के दलदल से लोगों को मुक्ति दिला सकती है। जरूरी है, अच्छे नेतृत्वकर्ता की।
अशोक कुमार जैसवाल, लायंस क्लब।
धन-बल प्रभावित करता है
हर राज्य में क्षेत्रीय पार्टियां है। मप्र में उसका भी कोई विकल्प नहीं है। जनता का किसी व्यापारी या सामाजिक कार्यकर्ता को सपोर्ट नहीं है। धन-बल को छोड़ एेसे कार्यकर्ताओं को आगे लाने के लिए पत्रिका की पहल बदलाव लाएगी।
सागर गुप्ता, कशौंधन वैश्य सामाज।
प्रतिनिधित्व से बदलेगा देश
जिस दिन नेता सोच लें, उसे जनता का प्रतिनिधित्व करना है उसे जिम्मेदारी का अहसास होगा और सम्मान भी मिलेगा। जब हम सर्वश्रेष्ठ होंगे तभी समाज और देश में बदलाव ला सकेंगे।
सन्यम जैन, समाजसेविका।
लोग ही बदलाव लाएंगे
आज कानून सख्त है, पार्टी के सहारे की जरूरत नहीं। देश के प्रति निष्ठा ही राजनीतिज्ञ की पहचान है। पत्रिका इस अभियान से इसे दिलाने की कोशिश कर रहा है।
विजय गुप्ता, समाजसेवी।
जमीनी स्तर पर पहल
वोट बैंक की राजनीति के लिए नेता कथाओं के आयोजन कर रहे हैं लाखों खर्च कर देते हैं। जमीनी स्तर पर साफ-सफाई से परहेज है। समाज को समर्पित युवा चेहरे ही बदलाव का कारण बनेंगे।
दीपक बुधौलिया, सामाजिक कार्यकर्ता।
इमानदार लोगों की जरूरत
राजनीति में इमानदार लोगों की जरूरत है, जो देश के प्रति इमानदार हैं, वह आगे आएगा तो समाज बदलेगा। बगैर विचारों वाले लोगों के आने से राजनीति के स्तर में गिरावट होगा।
रामजी गुप्ता, मंत्री, खरे केशरवानी समाज।
कौशल व योग्यता पर मोहर लगे
जनता के पास तीसरा विकल्प नहीं है। वह सिर्फ पार्टी देखती है, उम्मीदवार की योग्यता नहीं। प्रत्याशी की कार्य कौशल पर मुहर लगाना होगी, तभी परिवर्तन होगा।
संजय बंका, समाजसेवी।
नए चेहरे की जरूरत
वर्तमान सरकारें भ्रष्टाचार व महंगाई पर काम नहीं कर पा रही हैं। विपक्ष भी कमजोर है। नए चेहरे परिवर्तन ला सकते हैं। पत्रिका की पहल इसी दिशा के लिए युवाओं को प्रेरित करती है।
जितेंद्र सबनानी, सिंधी समाज।
Published on:
08 Apr 2018 02:15 pm
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