17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘अमृत’ के काम में ठेकेदारों की मनमानी, उपभोक्ता परेशान

रसीद कटवाने के बाद भी नहीं कर रहे नल कनेक्शन, कभी नल सामग्री तो कभी कर्मचानी न होने का बहाना

2 min read
Google source verification
Contractor's arbitrariness, consumer disturbances in the work of 'Amrit'

Contractor's arbitrariness, consumer disturbances in the work of 'Amrit'

सतना. अमृत योजना के तहत शहर में नए नल कनेक्शन देने के लिए ठेका एजेंसी द्वारा रखे गए काम चलाऊ पेटी ठेकेदार उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। ठेकेदारों के पास न तो कनेक्शन करने के लिए पर्याप्त उपकरण है और न ही कर्मचारी। इससे उपभोक्ताओं को नए नल कनेक्शन देने में लेटलतीफी हो रही है। स्थिति यह है कि गर्मी में जल संकट से जूझ रहे जिन उपभोक्ताओं ने नए नल कनेक्शन के लिए निगम में राशि जमा कर रसीद कटा ली है उन्हें भी महीना बीत जाने के बाद नई पाइप लाइन से कनेक्शन नहीं दिया गया है।

जिन कॉलोनियों में अमृत योजना की नई पाइप लाइन बिछ गई है वहां के रहवासी नए नल कनेक्शन के लिए निगम में राशि जमा कर रसीद कटा रहे हैं। नगर निगम द्वारा रसीद कटाने वाले उपभोक्ताओं को नल कनेक्शन करने वाले ठेकेदार का नंबर दिया गया है। जब उपभोक्ता ठेकेदारों से संपर्क करते हैं तो वे यह कहते हुए कनेक्शन करने से मना कर देते हैं कि आज मजदूर नहीं मिले। कल मजदूर मिलने पर कनेक्शन कर दिया जाएगा। ठेकेदार की यह मनमानी उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रही है। नल कनेक्शन का पैसा जमा करने के बाद भी पानी के लिए भटक रहे उपभोक्ताओं में निगम प्रशासन एवं ठेकेदार की कार्यशैली के प्रति आक्रोश पनप रहा है।

सात दिन का समय छह माह इंतजार
अमृत योजना ठेकेदार से निगम द्वारा किए गए अनुबंध के अनुसार उपभोक्ता द्वारा नल कनेक्शन की फीस जमा करने के एक सप्ताह के अंदर उसे नया नल कनेक्शन देना होगा। लेकिन निगम इंजीनियरों की मेहरबानी से ठेकेदार अनुबंध की शर्त का पालन नहीं कर रहे हैं। नए नल कनेक्शन कराने शहरी उपभोक्त छह माह से नगर निगम के चक्कर लगा रहे हैं। न तो ठेकेदार द्वारा नल कनेक्शन किया जा रहा और न ही नगर निगम में उपभोक्ताओं की कोई सुनवाई हो रही।

प्रति दिन 50 शिकायते
गर्मी का मौसम शुरू होते ही शहर में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। नल कनेक्शन को लेकर निगम में प्रतिदिन 50 से अधिक शिकायतें आ रही हैं। इनमें से आधी शिकायतों का समाधान भी अधिकारी नहीं करा पा रहे।