
Dashera 2018: Mahatma Pranath gave the protection of Chhatrasal on the
सतना । शहर के श्रीकृष्ण प्रणामी मंदिर में दशहरा के शुभ अवसर पर हर वर्ष होने वाले धर्मध्वजारोहण का कार्यक्रम संत मोहन प्रियाचार्य के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। संत माोहन प्रियाचार्य ने धर्म ध्वजारोहण करने के बाद कहा कि महामति प्राणनाथ की वाणी को आत्मसार करने के साथ हमें धर्म रक्षा के साथ राष्ट्र सेवा में लगाना होगा। हमारे गुरुजनों ने हमें मानव सेवा से जोड़ा है। जन-जन में सेवाभाव की अलख जगाने वाले राष्ट्र संत मंगलदास गुरुजी के सिद्धांतो को हम सभी को अपने जीवन में उतारे की जरुरत है। महामति प्राणनाथ की वाणी व सिद्धांत को गुरुजी ने विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाया है। आज भी गुरु जी के भक्त मानव सेवा की अलख जन-जन तक पहुंचाते आ रहे है। संत मोहन प्रियाचार्य ने आगे कहा कि महामति प्राणनाथ ने दशहरा दिवस पर बुन्देल केशरी छत्रसाल महाराज को तलवार एवं बीड़ा(पान) देकर धर्म एवं राष्ट्र रक्षा करने का संकल्प दिलाया था। आज भी इसी नियम को पन्ना महाराज के वंसज करते आ रहे है। इस मौके पर श्रीकृष्ण प्रणामी मंदिर महंत स्वामी परमानंद महाराज ने दशहरा एवं प्रणामी धर्म पर अपने विचार रखे। इस मौके पर देश भर में महामति प्राणनाथ महाराज के जागनी रथ के साथ आए संतों का सम्मान किया गया।
संत मोहनप्रियाचार्य नें डिस्पोजल, पन्नी त्यागने शपथ दिलाई
संत मोहन प्रियाचार्य ने सर्व समाज को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे देश में डिस्पोजल, पन्नी व थर्माकोल के वस्तुओं का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंध होना चाहिए। इस को लेकर प्रणामी समाज ने बीड़ा उठाया है। सर्व समाज को संत मोहन प्रियाचार्य ने डिस्पोजल, पन्नी व थर्माकोल के उपयोग को त्यागने की शपथ दिलाई साथ ही हर मंदिर को हरियाली से जोडऩे के लिए पौध रोपण करने का संकल्प दिलाया गया। संत ने आगे कहा कि हमारे गुरुजनों ने हमें धर्म रक्षा के साथ मानव रक्षा का भी संकल्प दिलाया था जिसे हमें करना होगा।
जागनी रथ यात्रा का जगह-जगह स्वागत
गुरुवार की रात 7 बजे जैसे ही गौशाला चौक में श्रीजागनी रथ का प्रवेश हुआ। सर्वसमाज ने फूल माला से स्वागत किया। इसी प्रकार जयस्तम्भ चौक में नवदुर्गा समिति व सामाजिक संगठनों ने जागनी रथ यात्रा व धर्मप्रचार मोहन प्रियाचार्य महाराज का फूल माला से स्वागत किया गया। रथ यात्रा गौशाला चौकए सिटी कोतवाली चौक, जयस्तम्भ चौक, दद्दू चौक होने हुए श्रीकृष्ण प्रणामी मदिर पहुंची। स्वामी परमानंद महाराज ने रथ में विराजे श्रीराजश्यामाजी की आरती की गई। इस मौके पर जागनी रथ में आए भक्तों का प्रणामी समाज के प्रबुद्धजनों ने भव्य स्वागत किया।
महामति प्राणनाथ ने की विश्वधर्म अथवा मानव धर्म की स्थापना
महामति प्राणनाथ ने विश्व धर्म की स्थापना की थी। उन्होने धार्मिक एकता पर जोर दिया एवं सर्वधर्म समभाव बताकर एक विश्व धर्म अथवा मानव धर्म की स्थापना की थी। तारतम वाणी में परमधाम 25 पक्ष का वर्णन किया गया है। इसमें विश्व में प्रचलित सभी धर्मग्रंथों का सार निहित है। यह बात महामति प्राणनाथ की अमृत वाणी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए श्रीजागनी रथ यात्रा लेकर आये धर्म प्रचारक स्वामी मोहन प्रियाचार्य ने श्रीकृष्ण प्रणामी मंदिर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही गई। उन्होने कहा कि तारतम वाणी में 18 हजार चौपाईयां है। जिसमें हिन्दीए गुजराती, सिंधी,अरबी, जाटी भाषा के अतिरिक्त विविध भाषाओं के शब्दों का समावेश किया गया है। महामति तत्काल प्रचलित बोली हिन्दुस्तानी भाषा के महान समर्थक थे। उन्होने अपनी वाणी में कहा है कि सबको सुगम जानकेए कहुंगी हिन्दुस्तान।
देश- विदेश में प्रणामी धर्म के 50 लाख से अधिक अनुयायी
मोहन प्रियाचार्य ने बताया कि सर्वधर्म समभाव के सूत्र को लेकर प्रसारित प्रणामी धर्म के अनुयायी आज भारत के प्रायरू सभी प्रांतों में है। भारत के अतिरिक्त नेपालए भूटान, यूएसए, कनाडा, यूके, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया आदि देशों में भी प्रणामी धर्म के अनुयायी है। श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म में जातिवादए भाषावाद का कोई प्रश्र नहीं उठता। सभी जाति तथा भाषा के लोग एक साथ मिलकर उस दूसरे प्रणामी भक्त से मिलते समय प्रणाम का व्यवहार करते है। अक्षरातीत पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण को इष्ट मानकर युगल स्वरुप की उपासना की जाती है। श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म के अनुयायियों को सुन्दरसाथ कहा जाता है। उन्होने बताया कि देश भर में 600 से अधिक मंदिर व सामाजिक संस्थान है। श्रीकृष्ण प्रणामी धर्मानुयायियों को भारत सहित पूरे विश्व में संगठित करने वाले महामति प्राणनाथ ने सबसे पहले सूरत एवं पन्ना में धामों की स्थापना की। इसके अलावा पूरे देश में धर्म के प्रमुख केन्द्र स्थान है। इसके अतिरिक्त अनेक स्थानों पर श्रीकृष्ण प्रणामी मंदिरए स्कूलए कॉलेज, हॉस्पीटल, गौशाला, अनाथ आश्रम एवं वृद्धाश्रम जैसी कुल 600 से अधिक सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं है।
Published on:
20 Oct 2018, 3:37 PM IST
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