
सतना। मैहर जिले के भमरहा स्थित एक अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्थान के कर्मचारियों को 2.45 करोड़ रुपये के एरियर भुगतान के मामले में गंभीर अनियमितता सामने आई है। आरोप है कि जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के जिला संयोजक ने नियमानुसार मैहर कलेक्टर से अनुमोदन लेने के बजाय सतना कलेक्टर से स्वीकृति प्राप्त कर ली। मामला सामने आते ही कलेक्टर सतना ने भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी है और तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। जांच समिति में अपर कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और जिला कोषालय अधिकारी को शामिल किया गया है। समिति पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
ये है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, भमरहा स्थित अनुदान प्राप्त यह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहले सतना जिले के रामनगर विकासखंड में संचालित होता था और इसका संचालन पांडेय शिक्षा समिति द्वारा किया जाता था। वर्ष 2014 में इस संस्था को आदिम जाति कल्याण विभाग (वर्तमान में जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग) में शामिल कर लिया गया, जिसके बाद यहां कार्यरत कर्मचारी शासकीय सेवक माने गए। शासकीयकरण के बाद कर्मचारियों को राज्य शासन के अनुसार वेतनमान दिया जाने लगा। इसी क्रम में पांचवें वेतनमान से छठवें वेतनमान में वेतन अंतर की राशि (2006 से 2010 तक) का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। हालांकि, मई 2010 से जून 2025 के बीच महंगाई भत्ते (डीए) के अंतर की राशि, जो पांचवें और छठवें वेतनमान के बीच बनती है, कुल 2,45,15,537 रुपये आंकी गई। इसी राशि के भुगतान के लिए अनुमोदन लिया गया।
यहां हुआ प्रक्रिया में खेल
प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद भमरहा क्षेत्र अब मैहर जिले में आता है। ऐसे में इस संस्था से जुड़े किसी भी वित्तीय अनुमोदन के लिए मैहर कलेक्टर से स्वीकृति लेना अनिवार्य था। लेकिन आरोप है कि जिला संयोजक डॉ. अरुण शुक्ला ने यह अनुमोदन मैहर के बजाय सतना कलेक्टर से प्राप्त कर लिया। इतना ही नहीं, अनुमोदन प्रस्ताव में संस्था के मैहर जिले में स्थित होने का उल्लेख तक नहीं किया गया, जिससे कलेक्टर सतना को वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं हो सकी।
अब तक यह थी प्रक्रिया
विभागीय जानकारी के अनुसार, मैहर जिला बनने के बाद वहां स्थित संस्थाओं से जुड़े सभी भुगतान अनुमोदन मैहर कलेक्टर द्वारा ही किए जाते रहे हैं। इससे पहले इसी संस्था के सामग्री क्रय, एरियर और छात्रवृत्ति से जुड़े भुगतान का अनुमोदन मैहर कलेक्टर से ही कराया गया था। मामले में यह सवाल उठ रहा है कि जब पूर्व में सभी अनुमोदन मैहर से ही हो रहे थे, तो इस बार प्रक्रिया क्यों बदली गई। आरोप यह भी हैं कि बड़ी राशि होने के कारण परीक्षण से बचने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया।
जिला संयोजक की सफाई
जिला संयोजक डॉ. अरुण शुक्ला का कहना है कि दोनों जिलों का डीडीओ पावर उनके पास है और कोषालय सतना में होने के कारण उन्होंने सतना कलेक्टर से अनुमोदन लिया। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि संस्था मैहर जिले में होने के बावजूद वहां से स्वीकृति क्यों नहीं ली गई, तो वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
"जब संस्था मैहर जिले में है, तो अनुमोदन भी वहीं से लिया जाना चाहिए था।" - सुशील मिश्रा, जिला कोषालय अधिकारी
"इस प्रकरण की जानकारी नहीं दी गई, जबकि पूर्व में ऐसे सभी अनुमोदन हमारे माध्यम से होते रहे हैं।" -रानी बाटड, कलेक्टर मैहर
"मामला संज्ञान में आते ही भुगतान पर रोक लगा दी गई है और जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।" - डॉ सतीश कुमार एस, कलेक्टर सतना
Updated on:
21 Mar 2026 09:52 am
Published on:
21 Mar 2026 09:50 am
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