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जिंदा होने का प्रमाण देने के लिए उमड़ी भीड़, पेंशनर हैं तो आप भी जान लें ..क्या और कैसे करना होगा

विडंबना: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय में दिनभर लगी रही पेंशनर्स की कतार , चार जिलों के लिए सिर्फ एक आदमी, दिनभर में हो पा रही 150 फीडिंग, जिंदा होने का प्रमाण देने के लिए दिनभर लाइन में लगे रहे बुजुर्ग

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सतना

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Sajal Gupta

Nov 13, 2018

epf new rules in hindi 2018 and Satna office Address

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सजल गुप्ता@सतना। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के भरहुत नगर स्थित कार्यालय में पेंशनर्स को खुद के जीवित होने का प्रमाण-पत्र देने के लिए सोमवार को दिनभर कतार लगी रही। यह प्रमाण-पत्र साल में एक बार नवंबर के पहले 15 दिन में जमा कराना जरूरी होता है। यह कार्यालय संभागीय कार्यालय की तरह काम कर रहा है। पहले रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली जिले के कर्मचारियों को जबलपुर जाना होता था, दो साल से सारा काम सतना में ही हो रहा।

एक ही कर्मचारी मौजूद

चार जिले का काम संभालने के लिए सोमवार को एक ही कर्मचारी मौजूद था। यहां पहुंचे लोगों को अपना आधार कार्ड और पीपीओ नंबर इ-वेरिफाइ कराना था। इसकी फीडिंग का काम ऑनलाइन हो रहा है। दोपहर दो बजे तक 80 और दिनभर में 150 आवेदन ही फीड हो पाए।

यहां न पानी न ही बैठने की

कुछ लोगों को लौटना पड़ा। दीपावली के अवकाश और शनिवार-रविवार को काम बंद होने से सोमवार को ऑफिस खुलने से पहले ही लोग ही पहुंच गए। दूरदराज से आए पेंशनर्स के लिए यहां न पानी की व्यवस्था थी, न ही बैठने की। इसलिए उन्हें सड़क पर ही बैठना पड़ा।

एक बीमार, दूसरे की बदली
संभागीय कार्यालय में सोमवार को सिर्फ एक ही कर्मचारी था। उन्होंने बताया कि अकाउंटेंट बीमार हैं। इओ का ट्रांसफर हो चुका है। इनके अलावा कार्यालय प्रमुख असिस्टेंट कमिश्नर पदस्थ हंै।

पांच मिनट के काम में पूरा दिन लग गया
मैं सुबह आया था, अब साढ़े तीन बजे जाकर काम पूरा हो पाया है। पांच मिनट के काम के लिए आज का पूरा दिन चला गया। यहां न बैठने की व्यवस्था है, न पीने का पानी। पीने के पानी के लिए गली के लोगों का घर ही खटखटाना पड़ता है।
रामविश्वास कुशवाह, पेंशनर

बुजुर्गों ने बयां किया दर्द
मैं पन्ना का रहने वाला हूं। यहां दूसरी बार आया हूं। देखता हूं कि आज काम होता है या नहीं। जीवित होने को प्रमाणित करने के लिए आधार कार्ड जमा कर दिया हूं। नंबर अभी नहीं आया है। स्टाफ की कमी है, एक कर्मचारी सभी का काम कर रहा है।
अभिमन्यु गौतम, पेंशनर, पन्ना

मैं चुरहटा अमरपाटन से आया हूं। सुबह ९ बजे से बैठा हूं। जितना मुझे एक साल में मिलता है, ऐसा लग रहा कि यहां आने जाने में खर्च हो जाएगा, आधार कार्ड दिखाने के बाद अंगूठा लगाना है, लेकिन इतने के लिए सुबह से बैठा हूं। अब शाम हो गई है।
दिनेश कोरी, पेंशनर, अमरपाटन