मैं चुरहटा अमरपाटन से आया हूं। सुबह ९ बजे से बैठा हूं। जितना मुझे एक साल में मिलता है, ऐसा लग रहा कि यहां आने जाने में खर्च हो जाएगा, आधार कार्ड दिखाने के बाद अंगूठा लगाना है, लेकिन इतने के लिए सुबह से बैठा हूं। अब शाम हो गई है।
दिनेश कोरी, पेंशनर, अमरपाटन