टीवी नहीं देख पाती
कल्पना कहती हैं कि महिला होने के नाते टीवी के प्रति रुझान जरूर है। लेकिन, इन दिनों अपने लिए ही समय नहीं मिल रहा, तो टीवी देखना दूर की बात है। परिवार के लोगों से चर्चा भी बहुत कम होती है। सुबह नाश्ते के दौरान थोड़ी-बहुत बात हो पाती है। उसके बाद मोबाइल से ही संपर्क होता है। इस तरह पूरा दिन गुजर जाता है। वो कहती हैं कि मेरे लिए क्षेत्र ही परिवार है। इसलिए मेरे दिमाग में परिवार की बात ज्यादा नहीं आती।