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20 साल बाद महिला टीचर की मार्कशीट अमान्य, मिला सेवा समाप्ति का नोटिस

- साल 2003 में महिला टीचर की लगी थी संविदा शिक्षक वर्ग-2 पद पर नौकरी। 20 साल बाद संचालक लोक शिक्षण ने उस अंक सूची को स्नातक के समकक्ष मानने से इनकार करते हुए हुए उनकी नियुक्ति को अवैध ठहरा दिया है।

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सतना. स्नातक की जिस अंक सूची के आधार पर साल 2003 में शिक्षिका प्रेमा त्रिपाठी को जनपद पंचायत नागौद की ओर से संविदा शिक्षक वर्ग-2 पद पर नियुक्त किया गया था, 20 साल बाद संचालक लोक शिक्षण ने उस अंक सूची को स्नातक के समकक्ष मानने से इनकार करते हुए हुए उनकी नियुक्ति को अवैध ठहरा दिया है। सीईओ जिला पंचायत परीक्षित झाड़े ने इस आधार पर शिक्षिका को सेवा समाप्ति का नोटिस भी जारी किया है।

अंकसूची अमान्य घोषित
नागौद संकुल के बचबाई माध्यमिक शाला में अध्यापक पद पर पदस्थ प्रेमा त्रिपाठी की स्नातक की अंक सूची के तौर पर मध्यमा (विशारद) हिन्दी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद की अंक सूची लगाई थी। इसी आधार पर उन्हें बीस साल पहले संविदा शिक्षक वर्ग-2 में नियुक्ति मिल गई थी। अध्यापिका नेे यही अंक सूची स्नातक के समक्ष करार देते हुए हाल ही में माध्यमिक शिक्षक के पद पर नवीन संवर्ग में नियुक्ति के लिए आवेदन में लगाई थी। उसकी मान्यता को लेकर डीइओ ने संचालक लोक शिक्षण से मार्गदर्शन मांगा था। इसकी समीक्षा के बाद संचालक लोक शिक्षण भोपाल ने अंक सूची को स्नातक के समकक्ष मानने से इनकार कर दिया। चूंकि यही अंक सूची संविदा शिक्षक वर्ग-2 में भी लगाई गई थी, इसलिए वहां भी इसे अमान्य मानकर कार्यवाही शुरू की गई है।

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संचालक ने यह दिया मार्गदर्शन
संचालक लोक शिक्षण मप्र केके द्विवेदी ने मार्गदर्शन में कहा कि 18 सितंबर 1973 द्वारा हिंदी परीक्षाओं को मान्यता देने के संबंध में परिपत्र जारी किया गया था। उक्त अनुक्रम में प्रेमा त्रिपाठी की हिन्दी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद की मध्यमा (विशारद) की अंक सूची को स्नातक के बराबर नहीं माना जा सकता है। जिला पंचायत सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े का कहना है कि महिला टीचर प्रेमा त्रिपाठी ने स्नातक की जो अंक सूची संविदा शिक्षक वर्ग-2 की नियुक्ति के समय लगाई थी लोक शिक्षक संचालनालय ने उसे अमान्य कर दिया है। इसलिए उनके पास पद के समकक्ष स्नातक की डिग्री न होने के कारण सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया है। जवाब के आधार पर उनकी सेवा समाप्ति के संबंध में निर्णय किया जाएगा।

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