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वृद्धा के दम तोड़ते ही नजूल भूमि में कब्जे का विवाद गहराया, पुलिस भी खेल करने में जुटी

सिद्धार्थ नगर में बन रही विवाद की स्थिति, लोगों ने गिराई दीवार

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Fight of government land

Fight of government land

सतना. सिद्धार्थ नगर स्थित एक नजूल आराजी को लेकर विवाद की स्थिति गहराती जा रही है। नजूल भूमि में कब्जे को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। गुरुवार की शाम को स्थानीय लोगों ने इस आराजी पर हुए निर्माण का काफी हिस्सा गिरा दिया। उल्लेखनीय है बुधवार को भी इस मामले में विवाद की स्थिति बनी थी और मौके पर पुलिस भी पहुंची थी। हालांकि इस पुलिसिया कार्रवाई को स्थानीय लोगों ने भू-कारोबारी के इशारे पर की गई कार्रवाई बताया है। उधर नजूल तहसीलदार की भूमिका भी इस मामले में सवालों में आ रही है। लोगों का कहना है कि यह जमीन जब नजूल की है तो उनके द्वारा इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर जमीन सुरक्षित करने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? कलेक्टर से इस मामले की जांच की मांग की गई है।

स्वत्व को लेकर विवाद
सिद्धार्थ नगर में स्थित नजूल भूमि विवाद नजूल शीट क्रमांक 66 के भूखंड 70 का है। जो कि शासकीय दस्तावेजों में सरकारी और उसमें बतौर कब्जेदार कुछ नाम दर्ज है। इसी भूखण्ड के अंश रकबे पर अपने अपने स्वत्व के दावे को लेकर दो पक्षों में विवाद की स्थिति बन गई है। आए दिन हो रहे विवाद से यहां किसी दिन बड़ी घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नजूल भूखण्ड की कब्जेदार लालाबाई की मौत के बाद इस जमीन पर कब्जे को लेकर तमाम दावेदार सामने आ रहे हैं। नजूल विभाग के अफसरों द्वारा स्थिति स्पष्ट नहीं करने यहां रोज विवाद हो रहे हैं। पुलिस भी यहां लोगों के इशारे पर काम कर रही है। जबकि नजूल तहसीलदार ने यथा स्थिति रखते हुए प्रकरण निराकरण के लिये सक्षम न्यायालय में जाने के आदेश कर दिये हैं।

यह है स्थिति
एक पक्ष द्वारा बताया जा रहा है कि इस जमीन पर काफी पहले से एक वृद्धा निवास कर रही थी। उसके द्वारा दान में मंदिर के लिये जमीन दी गई। उधर दूसरे पक्ष द्वारा इस जमीन को अपनी खरीदी आराजी बताते हुए अपने स्वत्व का दावा किया जा रहा है। मोहल्लेवासियों का आरोप है कि इसके पीछे बड़े भू-कारोबारियों का हाथ है।

स्टे के बाद भी निर्माण
मामले को नजूल तहसीलदार के यहां ले जाया गया। वहां शुरुआती दौर में स्टे दिया गया। लेकिन दूसरे पक्ष द्वारा स्टे का पालन न करते हुए न केवल इस आराजी में पूर्व से बने घरों को जबरिया गिराया गया बल्कि इसके अन्य क्षेत्र में निर्माण कार्य चालू कर दिया गया। इसकी सूचना जब कोलगवां थाना पुलिस को स्थानीय लोगों ने दी तो तब पुलिस नहीं पहुंची।

अपनी जमीन बताने लगी पुलिस
उधर बुधवार को एक बार तब पुलिस की भूमिका चर्चा में आ गई जब यहां निर्माण कार्य का विरोध कर रहे स्थानीय लोगों को भगाने पुलिस बल पहुंचा। स्थानीय लोगों ने बताया कि भू-कारोबारी के इशारे पर यथा स्थिति के आदेश के बाद भी चल रहे काम के दौरान नहीं पहुंचने वाली पुलिस अचानक एक बार फिर उनके पक्ष में दल बल के साथ पहुंची। इस नजूल की जमीन को अपनी जमीन बताते हुए एसआई शिशिर पाण्डेय ने वहां निर्माण का विरोध कर रहे लोगों से चिल्ला चोट की। लोगों ने बताया कि जब दस्तावेज लेकर स्थानीय नागरिक थाने पहुंचे तो वहां पुलिस अधिकारी ने थाने के अंदर बैठा कर धमकी दी। बहरहाल इस मामले में नजूल न्यायालय इसी स्थिति में समाप्त करते हुए सक्षम न्यायालय में जाने के आदेश दिये हैं। ऐसे में सक्षम न्यायालय के फैसले तक यथा स्थिति रहनी चाहिये। लेकिन दूसरा पक्ष इसमें निर्माण कराने पर आमादा है।