
gayatri jayanti 2018 in satna
सतना। हिन्दू धर्म में मंत्र जप का विशेष महत्व बताया गया है। वो भी जब गायत्री मंत्र की बात आए तो हर इंसान का मन गुन-गुनाने लगता है। गायत्री मंत्र का जप एक ऐसा उपाय है जिसको करने से मानसिक शांति को मिलती ही है साथ ही जीवन में आने वाली हर तरह की भूत-बाधाएं भी दूर हो जाती है। यही कारण है कि शास्त्रों में मंत्रों को बहुत ही चमत्कारी और शक्तिशाली बताया गया है।
इन्हीं मंत्रों में से एक है गायत्री मंत्र। जिसका जप करने से कई फायदे होते है। यहां तक की नियमित पूजा-पाठ व भजन-संध्या से आप मालामाल हो सकते है। कब गायत्री माता की कृपा आप पर बरस जाए। आपको कतई भी अंदाजा नहीं होगा।
गायत्री मंत्र के पांच फायदे
1- गायत्री मंत्र का जप अगर सबसे ज्यादा किसी को फायदा पहुंचाता है वह छात्रों को। अगर कोई छात्र का मन पढऩे में नहीं लगता है तो रोजाना गायत्री मंत्र का जप करने इस समस्या का निदान हो जाता है।
2-अगर किसी इंसान को संतान प्राप्ति करने में समस्या आ रही हो या फिर संतान को कई तरह की परेशानियां घेरे रहती है तो गायत्री मंत्र का जप करने से यह बाधा भी दूर हो जाती है।
3- गायत्री मंत्र के नियमित जप से गंभीर से गंभीर रोगों का नाश होता है। किसी भी शुभ मुहूर्त में कांसे के बर्तन में जल भरकर 108 बार गायत्री मंत्र का जप किया जाय तो रोग दूर भागते हैं।
4- यदि नौकरी से परेशान हैं, व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा है या फिर मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है तो गायत्री मंत्र का जाप करना सबसे शुभ माना जाता है। शुक्रवार के दिन पीले वस्त्र पहनकर गायत्री मंत्र का जाप करने से इस समस्या से निजात मिल जाती है।
5- यदि किसी लड़के या लड़की के विवाह में कोई देरी होती है तो सोमवार के दिन गायत्री मंत्र का 108 बार जप करने से विवाह कार्य में आने वाली सारी बाधांए दूर हो जाती है।
गायत्री मंत्र और उसका अर्थ
ऊँ भूभुर्व: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। अर्थात सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें। अथवा, उस प्राणस्वरूप, दु:खनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत: करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें।
गायत्री हवन से रोग नाश
किसी भी शुभ मुहूर्त में दूध, दही, घी एवं शहद को मिलाकर 1000 गायत्री मंत्रों के साथ हवन करने से चेचक, आंखों के रोग एवं पेट के रोग समाप्त हो जाते हैं। इसमें समिधाएं पीपल की होना चाहिए। गायत्री मंत्रों के साथ नारियल का बुरा एवं घी का हवन करने से शत्रुओं का नाश हो जाता है। नारियल के बुरे में यदि शहद का प्रयोग किया जाए तो सौभाग्य में वृद्धि होती है।
दरिद्रता का नाश करें
व्यापार, नौकरी में हानि हो रही है या कायज़् में सफलता नहीं मिलती, आमदनी कम है तथा व्यय अधिक है तो गायत्री मंत्र का जप काफी फायदा पहुंचाता है। शुक्रवार को पीले वस्त्र पहनकर हाथी पर विराजमान गायत्री माता का ध्यान कर गायत्री मंत्र के आगे और पीछे 'श्रींÓ सम्पुट लगाकर जप करने से दरिद्रता का नाश होता है। इसके साथ ही रविवार को व्रत किया जाए तो अधिक लाभ होता है।
Published on:
23 May 2018 06:02 pm
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